Wednesday, December 13

जानें, आखिर क्‍यों उल्‍टे हाथ में ही बांधी जाती है घड़ी

ये बात आपने भी सुनी होगी कि हमारा दिमाग हर वक़्त हर पल हर जगह हर स्थिति में कुछ ना कुछ अवश्य सोचता रहता है। चाहे हम सो ही क्यों ना रहे हो तब भी हमारे दिमाग में कुछ ना कुछ खिचड़ी अवश्य पकती रहती है। दिमाग के हर क्षण इतना काम करने के बाद भी हम अपने करीब की कुछ ऐसी चीजों को अनदेखा कर देते है जो हर पल हमारे साथ रहती है और हमारे जीवन का एक हिस्सा है। उन्ही में से एक है घडी तो बतायें कि आपमें से कितनों ने ये सोचा था कि हम घडी को उल्टे यानि बाए हाथ पर ही क्यों बांधते है? इसका जवाब बहुत ही रोचक हैं और आपको इसका जवाब जानने की बहुत दिलचस्पी भी हैं। शायद नहीं तो आज हम आपको बताते हैं…

ट्रिपिकल काम

पहले के दौर में भी घड़ी पहनने का नहीं उसे जेब में रखने का चलन ज्‍यादा था लेकिन जब धीरे-धीरे घड़ियों की डिजाइन में बदलाव हुए तो रखने में दिक्‍कत होने लगी। वे जेब में रखने से टूटने लगी। जिससे धीरे-धीरे इन्‍हें पहनने का रिवाज शुरू हो गया। इस दौरान पट्टे वाली घड़ियों से शुरुआत हुई। जिसमें घड़ी को एक हाथ से सीधे हाथ में बांधना भी एक बड़ा ट्रिपिकल काम होता था।

पहनने में आसानी

ऐसे में लोगों ने इस बात का हल निकाला और घड़ी को उलटे हाथ में पहनने लगे।
जिसे ठीक तरीके से पहनने में सिधे हाथ से पूरी मदद मिल जाती है।
यानी कि घड़ी की कील जिस छेद में फंसानी होती थी उसमें भी आसानी से फंसा लेते हैं। इस काम के लिए दूसरे की मदद भी नहीं लेनी पड़ती है। इसके अलावा इसके पीछे एक कारण और भी है।

चेन वाली घड़ी

कुछ लोगों को छोड़ दें तो अधिकांश लोग सारे काम सिधे हाथ से करते हैं।
ऐसे में जब लोग सिधे हाथ में घड़ी पहनते थे तो उसमें समय देखने में परेशानी होती थी। इसलिए भी लोग उलटे हाथ में घड़ी पहनना ज्‍यादा पसंद करते हैं।

हालांकि आज के जमाने में तो चेन वाली और कई डिजिटल घड़ियां भी बाजार में आ चुकी हैं, लेकिन रिवाज और सहूलियत के हिसाब से लोग आज भी घड़ियों को उल्‍टे हाथ में ही पहनते हैं।

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