तो इस वजह से महिलाएं नहीं फोड़ती नारियल, जानें क्‍या है कारण

भारतीय वैदिक परंपरा अनुसार श्रीफल शुभ, समृद्धि, सम्मान, उन्नति और सौभाग्य का सूचक माना जाता है। किसी को सम्मान देने के लिए उनी शॉल के साथ श्रीफल भी भेंट किया जाता है। भारतीय सामाजिक रीति-रिवाजों में भी शुभ शगुन के तौर पर श्रीफल भेंट करने की परंपरा युगों से चली आ रही है। विवाह की सुनिश्चित करने हेतु अर्थात तिलक के समय श्रीफल भेंट किया जाता है। बिदाई के समय नारियल व धनराशि भेंट की जाती है। यहां तक की अंतिम संस्कार के समय भी चिता के साथ नारियल जलाए जाते हैं। वैदिक अनुष्ठानों में कर्मकांड में सूखे नारियल को वेदी में हूम किया जाता है।

प्राचीन समय से ही नारियल से संबंधित कई प्रकार की परंपराएं प्रचलित हैं।इन्ही परंपराओं में से एक अनिवार्य परंपरा यह है कि हिन्दू धर्म में स्त्रियां नारियल नहीं फोड़ती हैं। आमतौर पर स्त्रियों द्वारा नारियल फोड़ने को अपशकुन माना जाता है।इसीलिए घर के बुजुर्ग और पंडित महिलाओ को नारियल फोड़ने से मना करते है |

आइये आज हम आपको नारियल से जुडी इस परम्परा के पीछे की कथा बताते है

दरअसल परम्परागत रूप से नारियल को नयी श्रृष्टि का बीज माना गया है और नारियल को बीज का स्वरूप माना गया है और इसे प्रजनन यानि उत्पादन से जोड़कर देखा गया हैं। स्त्रियों को संतान उत्पत्ति का कारक माना गया है, इसलिए उनके माध्यम से नारियल का फोड़ना वर्जित कर्म माना गया है। हालांकि किसी भी धार्मिक ग्रंथ में इस बात को लेकर कोई उल्लेख नहीं आया है, लेकिन सामाजिक मान्यताओं और विश्वास के चलते हिंदू महिलाएं अपने हाथों से नारियल नहीं फोडती हैं|

इसके अलावा एक औए मान्यता यह भी है की नारियल जो की भगवान् विष्णु की ओर से पृथ्वी पर भेजा गया पहला फल है और इसीलिए इस फल पर माँ लक्ष्मी का सबसे पहला अधिकार है और यही कारण है की कोई और स्त्री इस नारियल को नहीं फोड़ सकती है|

नारियल के पीछे एक कथा और भी जुडी हुई है जिसमे यह बताया गया है की ब्रह्म ऋषि विश्वामित्र ने विश्व का निर्माण करने से पहले नारियल का निर्माण किया था और  इसीलिए नारियल में ब्रह्मा ,विष्णु और महेश इन तीनो देवताओ का वास होता  इसीलिए महिलाओ को इससे दूर रखा जाता है |
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