गुप्त सुरंग से इस मंदिर में आती थी रानी पद्मावती, दिखती थीं कुछ ऐसी

संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म पद्मावती की कहानी को लेकर पुरे देश में विवाद आग की तरह फ़ैल चूका है और हर समुदाय के लोगो के द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है| इस फिल्म को लेकर राजस्थान समेत कई देशो में विवाद इस कदर बढ़ चूका है की राजस्थान के राजपूत करणी सेना ने फिल्म के एक्ट्रेस की नाक काटने पर पांच करोड़ के इनाम देने की बात भी कह दी है|

पद्मावती की कहानी राजस्थान के ऐतिहासिक चितौड़गढ़ किले से जुडी है इसलिए शुक्रवार को इस किले को बंद भी करवा  दिया गया है |

असल में राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में बने एक मंदिर में पद्मावती की प्रतिमा स्थापित है और यहाँ के लोग रानी पद्मावती को आज भी देवी की तरह पूजते है| इस मंदिर का निर्माण सन 1468 में राणा रायमल ने पद्मावती की मूर्ति की स्थापना के साथ करवाई थी | इस मंदिर में रानी पद्मावती के मूर्ति के अलावा इसमें भगवान पाश्वनाथ और महादेव की मूर्ति भी स्थापित है | इस मंदिर के पुजारी चंद्रशेखर का कहना है की मंदिर में बने गो मुख से 24 घंटे पानी गिरता जिसे आज तक बंद होते हुए नहीं देखा गया है |अधिकतर इस मंदिर में ब्राह्मण समाज के लोग पूजा पाठ करने आते हैं।

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मंदिर में जो पद्मावती की मूर्ति स्थापित है वो इतनी अदभुत कलाकारी से तैयार की गयी है की ऐसा लगता है की इसमें अभी भी जान है और मूर्ति में पद्मावती के हाथ में एक आइना दिखाया गया है जिसमे पद्मावती को कल्पना करते दिखाया गया है किसी को इतना खूबसूरत मत बनाना कि उसकी वजह से पूरा ही  राज्य तबाह हो जाए बर्बाद हो जाये ।

पद्मावती के इस मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर की दुरी पर एक सुरंग भी बनी है जो की रानी पद्मावती के महल से सीधे इस मंदिर तक पहुचती है और ऐसा कहा जाता है की रानी पद्मावती स्नान करने के उपरांत इसी सुरंग से होकर मंदिर में पूजा करने जाया करती थी और वो ऐसा इसलिए करती थी ताकि आते जाते समय किसी की  भी नजर उन पर ना पड़ जाये इसलिए वो अपनी सुन्दरता को सबकी नजरो से बचाकर रखना चाहती थी |

इन सारी बातों से यही लगता है कि पद्मिनी एक अद्वितीय सौंदर्य की अधिष्ठात्री रानी थी, जिसकी 700 वर्षों से चली आ रही इतिहास कथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी को सम्मोहित कर रही है |
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