Monday, December 18

जानें, ऑफिस या मॉल के टॉयलेट में दरवाज़ा नीचे से खुला क्यों होता है

दोस्तों हम अपने रोज के जीवन में अक्सर ऐसी-ऐसी चीज़ें देखते है जिनके पीछे कोई बहुत बड़ा लॉजिक छुपा होता है मगर वह इतना ज्यादा सामान्य होता है की हम हर दिन उसका कई बार इस्तेमाल तो कर लेते है मगर फिर भी उसके पीछे के छिपे तथ्यों को जानने की सोच भी नहीं पाते। आपको बता दे जब से नयी सरकार बनी है तब से हमारे देश मे ‘टॉयलेट’ शब्द पर काफी ज़ोर दिया जा रहा है। शौचालय बनवाना तो कभी खुले में शौच को रोकना और बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने तो देश को जागरूक करने के लिए ‘टॉयलेट’ नाम से फिल्म ही बना डाली है और मज़े की बात तो यह है की इस फिल्म की सरकार और जनता दोनों में ही काफी तारीफ की जा रही है।

आपको बता दे की कभी फिल्म के जरिये तो कभी चुनावी मुद्दे के जरिये टॉयलेट और टॉयलेट हैबिट्स को लेकर भले ही जागरूकता फैलाई जा रही है मगर बावजूद इसके टॉयलेट को लेकर कुछ ऐसी बातें हैं, जिनके बारे में आप अपना सर खुजा-खुजा कर टकले हो जायेंगे मगर सूझ नहीं रहा कि यह क्यों है और कैसे है? असल में सवाल यह है कि पब्लिक टॉयलेट्स या माल में दरवाज़ा फर्श से कुछ इंच ऊपरही क्यों खत्म हो जाता है, दरवाजा लगा ही है तो पूरा क्यों नहीं। ऐसे टॉयलेट्स आपने ऑफिस, मल्टीप्लेक्स या मॉल में ज़रूर देखे होंगे और आज हम आपको इसके पीछे की वजह बताएंगे।

पब्लिक टॉयलेट्स में छोटे दरवाज़े लगाने का विचार सबसे पहले अमेरीका में आया, यह तो हम सब जानते है की अमेरिका कितना विकसित देश है मगर इसके बाद भी इस तरह से छोटे दरवाजे लगाने के पीछे उसका उद्देश्य पैसे बचना नहीं था बल्कि ये उसकी एक खोज थी। असल में अमेरिका में लोग जो भी काम ज़रूर करते है उसके पीछे कोई बड़ा लॉजिक होता है। खैर अपने इस आइडिया से एक तो उन्होने छोटा दरवाज़ा लगाकर लकड़ी का बिल तो कम किया ही साथ ही लोगों की प्राइवेसी का भी ध्यान रखा। असल में दरवाजा छोटा होने से अगले को अंदर मौजूद व्यक्ति का पैर का थोड़ा हिस्सा दिख जाता था जिससे उसे यह पता चल जाता है की अंदर कोई है, अरे भाई, आखिर ये भी तो आराम का मामला है।

चूंकि टॉयलेट्स पब्लिक है तो उसका इस्तेमाल भी पूरा दिन होता रहेगा जिससे इनका फर्श भी लगातार खराब होता रहता है। फर्श और दरवाज़े के बीच जगह होने से टॉयलेट में पोछा लगाने, वाइपर और मॉप घुमाने में काफी सहूलियत मिलती है। दोस्तों यह तो हम सब जानते है की पब्लिक टॉयलेट्स का काम होता है आप पर से प्रकृति का प्रेशर कम करना, मगर कभी-कभी टॉयलेट में एक से ज़्यादा लोग घुस जाते हैं, एक अन्य तरह के प्राकृतिक प्रेशर कम करने के लिए एक शब्द में कहे तो “कामदेव वाला”। आपको पता होना चाहिए की पब्लिक टॉयलेट्स में इस सब काम की सख्त मनाही होती है और यही वजह है की दरवाज़ा ऐसा रखा जाता है कि प्राइवेसी रहे पर इतनी भी नहीं कि लोग किसी तरह का नया काम ना करने लगें। अक्सर ऐसा भी हो जाता है की छोटे बच्चे अंदर से टॉयलेट लॉक कर लेते हैं और उन्हें समझ नहीं आता कि लॉक खोलें कैसे। ऐसी स्थिति में यदि कोई मदद को ना हो तो बच्चा दरवाजे के नीचे वाली खाली जगह से निकाल सकता है।

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