Saturday, December 16

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आप भी मोबाइल पर गंदी वीडियो देखने के हैं शौकीन तो पढ़ ले यह खबर वरना चुकानी पड़ सकती है भरी कीमत

आप भी मोबाइल पर गंदी वीडियो देखने के हैं शौकीन तो पढ़ ले यह खबर वरना चुकानी पड़ सकती है भरी कीमत

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शायद आपको उतनी हैरानी ना हो यह जानकार की दुनिया भर में सबसे ज्यादा गंदी वीडियो अमेरिका और दूसरे नंबर पर भारत में देखी जाती है। बता दे की भारत में गंदी वीडियो लगभग रात के समय ज्यादा देखी जाती है, जिसके चलते भारत में लगभग रात के समय गंदी साइट पर हाई ट्रैफिक हो जाता है। मगर आपको बता दे की मोबाइल पर गंदी वीडियो देखने से आपको छोटे-मोटे नहीं बल्कि बहुत ही बड़े खतरा भी हो सकता है, चलिए जानते हैं वह कौन से हैं और आपको क्या करना चाहिए इन खतरों से बचने के लिए। अगर आप मोबाइल फोन पर गंदी वीडियो देखते हैं तो आपको हमेशा अपने मोबाइल फोन के सिम में केवल डाटा ही रखना चाहिए आपको उस SIM में कोई भी टॉक टाइम नहीं रखना चाहिए क्योंकि कुछ वेबसाइट है जो आपकी टॉक टाइम को सब्सक्रिप्शन के तौर पर बिना परमिशन लिए काट लेती है। अगर आप गंदी वीडियो देख रहे हैं तो आपको अपनी प्राइवेसी का पूरा ख्याल रखना चाहिए इसके लिए
युवा उद्यमशीलता को बढ़ावा देने का संकल्प है जागृति यात्रा : शशांक मणि त्रिपाठी

युवा उद्यमशीलता को बढ़ावा देने का संकल्प है जागृति यात्रा : शशांक मणि त्रिपाठी

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देवरिया : युवाओं में नवाचार तथा उद्यम को प्रोत्साहित कर रोजगार पाने वाले के स्थान पर रोजगार देने वाला बनाने का एक संकल्प है जागृति यात्रा। युवाओं में उद्यमशीलता को प्रोत्साहित कर नई कार्य संस्कृति निर्माण का एक 'अश्वमेध यज्ञ' है जागृति यात्रा। भारतीय युवाओं की नौकरी करने की मानसिकता रोजगार की समस्या को और विकराल बना दिया है। सभी को नौकरी मिलना लगभग असंभव है। इन विषम परिसिथतियों में एक ही रास्ता है जो की सारी समस्याओं का निदान कर सकता है, वह है उद्यमिता विकास। अत: आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारे युवावर्ग एक सफल उधमी का सपना संजोए और रोजगार के लिए दुसरों की ओर न देखे बलिक खुद दुसरों को रोजगार देने वाले बनें। जागृति संस्था के अध्यक्ष शशांक मणि त्रिपाठी एक ऐसे ही सपने के साथ जी रहे हैं जिसमें भारत का युवा जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर के तौर पर खुद को स्थापित कर सके। देवरिया में आयोजित ए
जारी हुआ प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप का नोटिफिकेशन, हर माह मिलेंगे 2000 से 2250 रुपये

जारी हुआ प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप का नोटिफिकेशन, हर माह मिलेंगे 2000 से 2250 रुपये

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बता दे कि केंद्रीय सैनिक बोर्ड ने प्रधानमंत्री स्कॉलरशिप स्कीम के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। यानी अब जो भी छात्र वर्ष 2017-18 में प्रथम वर्ष में नामांकन कराने जा रहे हैं वो इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। इच्छुक उम्मीदवार www.ksb.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की अंतिम तिथि 15 नवंबर, 2017 है। स्कॉलरशिप का विस्तृत ब्योरा इस प्रकार है- Click here to buy Samsung latest Smartphonehttp://amzn.to/2vKYA1U योग्यता 1. पूर्व-सैन्यकर्मियों के बच्चे जिन्होंने सत्र 2017 में इंजीनियरिंग/बीटेक/बीई/एमबीबीएस/बीडीएस/बीएड/बीबीए/बी.फार्मा /बीसीए/ एमबीए (प्रोफेशनल कोर्सेज की पूरी लिस्ट वेबसाइट www.ksb.gov.in पर उपलब्ध है) समेत विभिन्न प्रोफेशनल कोर्सेज के प्रथम वर्ष में एडमिशन लिया है। 2. सशस्त्र सेनाओं से जेसीओ या उससे नीचे की रैंक पर रिटायर पूर्व सैन्यकर्मी। (कमिशंड अधिक
इस लड़की ने गार्ड को लगाई आवाज और कहा भैया पानी नहीं आ रहा, उसके बाद जो हुआ उसे देख आप कहोगे कि आजकल शर्म तो है ही नहीं

इस लड़की ने गार्ड को लगाई आवाज और कहा भैया पानी नहीं आ रहा, उसके बाद जो हुआ उसे देख आप कहोगे कि आजकल शर्म तो है ही नहीं

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दिल्ली के लोग और खास कर युवा पीढ़ी अपनी मौज मस्ती को लेकर हमेशा सोशल मीडिया पर छाए रहते है. पर कभी कभी उनकी ये मौज मस्ती हद पार कर जाती है. जी हां आज हम आपको एक ऐसा ही वीडियो दिखाने वाले है, जिसे देखने के बाद आप भी सोचेंगे कि ये क्या हो रहा है. अब यूँ तो आपने सोशल मीडिया पर बहुत से वायरल वीडियो देखे होंगे पर ये कुछ अलग है. अब इस वीडियो में क्या अलग ये तो आपको देखने के बाद ही पता चलेगा. इसलिए गलती से भी इस वीडियो को नजरअंदाज मत कीजिएगा. वरना आप बहुत कुछ मिस कर जाएंगे. बरहलाल यह वीडियो सुनने में आपको जितना दिलचस्प लग रहा है, देखने में ये उससे कही ज्यादा दिलचस्प लगेगा. तो चलिए अब आपको और ज्यादा प्रतीक्षा न करवाते हुए, हम आपको ये वीडियो दिखा ही देते है. ये वीडियो देखिये और खुद जानिए कि ये देखें वीडियो:
आखिर कुत्‍ते चलती गाड़ियों का क्यों करते हैं पीछा

आखिर कुत्‍ते चलती गाड़ियों का क्यों करते हैं पीछा

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कभी अपनी कार में अंजान गलियों से होकर गुज़रिए। मोहल्ले के कुत्ते आपका पीछा ऐसे करते हैं, जैसे उनकी हड्डी चुरा कर आप भागे हों। कभी आपने सोचा है कि ये कुत्ते गाड़ियों का पीछा क्यों करते हैं. आपके दिमाग में ये बात आई हो न हो, लेकिन Quora पर एक व्यक्ति ने ये सवाल सबके सामने रखा। इस गंभीर सवाल का कई लोगों ने जवाब दिया, तो हमें भी कुत्तों की इस हरक़त का राज समझ आया। दरअसल, कुत्ते गाड़ियों के टायर पर टांग उठा कर पेशाब कर के अपने इलाके का दायरा तय करते हैं। ऐसे में जब कोई गाड़ी, जिसके टायर पर कुत्ते पेशाब कर चुके हों, वो दूसरे मोहल्ले से गुज़रती है तो कुत्तों को उसकी दुर्गंध आ जाती है और कुत्तों को वो सहन नहीं होती। किसी दूसरे मोहल्ले के कुत्ते जब किसी और इलाके में घुसते हैं, तो कुत्ते उसका लड़कर सामना करते हैं। इसके अलावा कुत्ते छोटे जानवर, बिल्ली, बाइक का वैसे ही पीछा करते हैं, जैसे गेंद,
जानें, आखिर क्‍यों उल्‍टे हाथ में ही बांधी जाती है घड़ी

जानें, आखिर क्‍यों उल्‍टे हाथ में ही बांधी जाती है घड़ी

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ये बात आपने भी सुनी होगी कि हमारा दिमाग हर वक़्त हर पल हर जगह हर स्थिति में कुछ ना कुछ अवश्य सोचता रहता है। चाहे हम सो ही क्यों ना रहे हो तब भी हमारे दिमाग में कुछ ना कुछ खिचड़ी अवश्य पकती रहती है। दिमाग के हर क्षण इतना काम करने के बाद भी हम अपने करीब की कुछ ऐसी चीजों को अनदेखा कर देते है जो हर पल हमारे साथ रहती है और हमारे जीवन का एक हिस्सा है। उन्ही में से एक है घडी तो बतायें कि आपमें से कितनों ने ये सोचा था कि हम घडी को उल्टे यानि बाए हाथ पर ही क्यों बांधते है? इसका जवाब बहुत ही रोचक हैं और आपको इसका जवाब जानने की बहुत दिलचस्पी भी हैं। शायद नहीं तो आज हम आपको बताते हैं… ट्रिपिकल काम पहले के दौर में भी घड़ी पहनने का नहीं उसे जेब में रखने का चलन ज्‍यादा था लेकिन जब धीरे-धीरे घड़ियों की डिजाइन में बदलाव हुए तो रखने में दिक्‍कत होने लगी। वे जेब में रखने से टूटने लगी। जिससे धीरे-धीरे इन्‍हें
जानें, क्‍या है GPS और यह कैसे करता है काम

जानें, क्‍या है GPS और यह कैसे करता है काम

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GPS यानि कि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, इस नाम से आप वाकिफ तो बेहतर ही होंगे क्योंकि आजकल स्मार्टफोन का जमाना है और शायद ही ऐसा कोई स्मार्टफोन होगा जिसमें यह सुविधा ना दी गयी हो। यह तो हम सभी जानते ही होंगे की जीपीएस की मदद से किसी जगह को खोजने में हमे मदद मिलती है या फिर खुद की लोकेशन देने में यह सिस्टम काफी मददगार है। मगर क्या आपको पता है जीपीएस असक्ल में है क्या, यह काम करता कैसे है और इसे बनाने के पीछे मकसद क्या रहा होगा। आपने इस सब के बारे में कभी सोचा ही नही होगा, खैर कोई बात नहीं आज हम आपको इसी सब के बारे में बताने के लिए यह लेख लेकर आये है जो शायद आपकी जानकारी में कुछ इजाफा कर दे। ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम एक सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम है जो आपकी लोकेशन तो बताती ही है साथ में मौसम और समय की जानकारी भी देती है। इस सिस्टम को यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा बनाया
ये डिजाइनर ब्लाउज बना सकते हैं आपकी खुबसूरती में लगा सकते हैं चार चांद

ये डिजाइनर ब्लाउज बना सकते हैं आपकी खुबसूरती में लगा सकते हैं चार चांद

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भारतीय परिधानों में साडि़यों का फैशन एक बार फिर महिलाओं के सिर चढ़ कर बोल रहा है। लेकिन बदलाव की एक झलक इस पारंपरिक परिधान पर भी साफ नजर आ रही है तभी तो पुराने ढंग से पहने जाने के बजाय इस को अब आधुनिक तरीकों से पहनने का ट्रैंड चल रहा है। साड़ी को अलग अंदाज देने के लिए डिजाइनर्स द्वारा न सिर्फ साड़ी, बल्कि ब्लाउज व पेटीकोट पर भी विभिन्न प्रयोग किए जा रहे हैं। साड़ी पहन कर हर एक लड़की वाकई में गजब की हौट और बिंदास नजर अाती है। इस अंदाज की साड़ी में किसी भी फीमेल की अपील दोगुनी हो जाती है।   1. प्लेन साड़ी और डिजाइनर बेल्ट आप दो रंगों को मैच करके साड़ी कैरी कर सकते है और अपना नया लुक दें सकते है। इसके साथ आप प्रिंटेड ब्लाउज़, मैचिंग प्लेन या फिर कॉन्ट्रास्ट कलर का ब्लाउज़ भी पहन सकती है। आप अपनी सिंपल साड़ी को डिफरैंट लुक देने के लिए बेल्ट पहन सकती हैं। 2. बोट-नेक ब्लाउड के साथ