गर्भावस्था के दौरान कब और क्यों की जाती है गोद भराई की रस्म, जानें इसके पीछे का रहस्य

गोदभराई गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली एक रस्म है। इसमें आने वाले बच्चे का स्वागत और गर्भवती महिला के मां बनने कि बधाई और आशीर्वाद दिया जाता है। कुछ लोग इस रस्म को गर्भावस्था के 7 महीने पूरे होने पर करते हैं और कुछ लोग 8 महीने पूरे होने के बाद इस रस्म को करते हैं। क्या आपको पता है कि इसके पीछे का कारण क्या है क्यों की जाती है किसी महिला की गोदभराई ? आइए हम आपको इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण बताते हैं।

क्यों की जाती है गोदभराई

जब घर में बच्चे के आने की खबर आती है तो पूरे परिवार में उत्साह भर जाता है। सबको बेसब्री से आने वाले मेहमान का इंतजार रहता है। इस दौरान मां को उनका और उनके बच्चे का ध्यान रखने कि सलाह दी जाती है। हिन्दू धर्म में संतान के जन्म से कुछ परंपराएं हैं उनमें से ही एक है गोदभराई। ये परम्परा प्राचीन समय से ही होती चली आ रही है।

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वैज्ञानिक कारण

गोदभराई की रस्म में गर्भवती महिला के आंचल में सूखे मेवे डाले जाते हैं, आप सभी को पता होगा कि ग्रभ में पल रहे शिशु को अधिक मात्रा में प्रोटीन लेने की जरूरत होती है तो इनके लिए सूखे मेवे काफी अच्छे साबित होते हैं। इससे बच्चे को हर तरह का पोषक तत्व प्रदान होता है। मेवे के साथ साथ फल का भी सेवन गर्भवती महिला के लिए काफी अच्छा होता है। इसीलिए इस रस्म में गर्भवती महिला को फल भी दिया जाता है। ताकि इसके सेवन से मां और बच्चा दोनों स्वास्थ्य रहे।

बच्चे के लिए विशेष पूजा

गोद भराई के रस्म में बच्चे के लिए एक विशेष पूजा कि जाती है ताकि बच्चे के उपर जो दोष हो वो नष्ट हो जाए। ये पूजा बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य की लिए की जाती है। इस तरह की पूजा से गर्भ में पल रहे बच्चे पर सकारत्मक का संचार होता है। सूखे मेवे से एक और फायदा होता है कि इसमें तैलीय गुणों के कारण चिकनाई होती है जिससे प्रसव के समय पीड़ा कम होती है और बच्चा स्वस्थ्य रहता है।

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