Sunday, December 17

बड़ी खबर: हो गया कंफर्म, एनडीए में शामिल होंगे नीतीश!

बिहार की सियासत पर हम बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। जिस तरह के हालात वहां की महागठबंधन सरकार में दिख रहे हैं उस से कई तरह की संभावनाओं को जन्म मिल रहा है। बिहार की राजनीति में एक अलग ही तरह का माहौल दिख रहा है। महागठबंधन में शामिल जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस के बीच में जिस तरह से दरारें आ रही हैं उसके बाद से तो ये साफ हो गया है कि सियासी महत्वकांक्षाएं महागठबंधन पर भारी पड़ रही है। इन सबके बीच सीएम नीतीश कुमार और बीजेपी के बीच बढ़ती नजदीकी किसी बड़े फैसले का आहट दे रही हैं। नीतीश के वापस एनडीए में शामिल होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। अब जी न्यूज ने भी इस खबर को प्रमुखता से उठाया है। जी न्यूज की खबर के मुताबिक नीतीश बहुत जल्द एनडीए में शामिल हो सकते हैं।

जी न्यूज की खबर के मुताबिक एक बार फिर से नीतीश कुमार और पीएम मोदी के बीच रिश्ते सामान्य हो सकते हैं। नीतीश एनडीए में शामिल हो सकते हैं। खबर के मुताबिक जेडीयू और बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के बीच में इस संबंध में बातें हो रही हैं। नीतीश की वापसी को लेकर रास्ता तैयार किया जा रहा है। नीतीश के एनडीए में आने की खबरों के पीछे सबसे बड़ा कारण लालू यादव को बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक नीतीश और लालू के बीच गहरे मतभेद हो गए हैं। लालू सरकार को अपने हिसाब से चलाना चाह रहे हैं। जिसके कारण नीतीश खुलकर काम नहीं कर पा रहे हैं। लालू के दोोनों बेटों, तेजस्वी और तेज को बिहार सरकार में अहम पद मिले हैं। कहा जा रहा है कि दोनों ही कुछ काम नहीं करते हैं। हालांकि अभी नीतीश की वापसी को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

बता दें कि पिछले कुछ समय से नीतीश कुमार और पीएम मोदी एक दूसरे की तारीफ कर रहे हैं। नोटबंदी के फैसले का जहां पूरा विपक्ष विरोध कर रहा था वहीं नीतीश ने इसका खुलकर समर्थन किया था। वहीं यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी को मिले प्रचंड बहुमत के बाद नीतीश ने पीएम मोदी को बधाई दी थी। दूसरी तरफ पीएम मोदी ने भी कई मौकों पर नीतीश की तारीफ की थी। इसी के बाद से कहा जाने लगा है कि कहीं नीतीश फिर से एनडीए का हिस्सा तो नहीं बनने जा रहे हैं। गौरतलब है कि नीतीश 17 साल तक एनडीए का हिस्सा रह चुके हैं। वो अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री भी रह चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने के बाद नीतीश ने गठबंधन तोड़ दिया था।

उसके बाद 2015 में बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने लालू यादव और कांग्रेस के साथ मिल कर महागठबंधन तैयार किया था। इस महागठबंधन को बिहार में कामयाबी मिली थी और बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन उसके बाद से नीतीश को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लालू के साथ उनके सुर ठीक से नहीं मिल रहे हैं। वहीं लालू के नेता लगातार नीतीश पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसके अलावा लालू अपने दोनों बेटों को बिहार सरकार में पूरी तरह से फिट करना चाहते हैं। वो तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम से मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। लेकिन नीतीश के रहते ऐसा हो नहीं पा रहा है। इन सबको देखते हुए ये साफ है कि महागठबंधन की दरार लगातार चौड़ी होती जा रही है। फिलहाल अब एक बार फिर से नीतीश के एनडीए में शामिल होने की खबरें जोरों पर हैं।

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