नवरात्रि के इन 9 दिनों का अलग-अलग होता है महत्व, आज ही जान लें

नवरात्रि के हर दिन का अपना एक अलग ही महत्व है, ऐसा माना जाता है कि माँ इन नौ दिनों में अपने भक्तो को हर मनोकामना को पूरा करती है। हिन्दू धर्म में यह त्यौहार पुरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है, तो चलिये आज हम आपको नवरात्रि के हर दिन के महत्व के बारे में बताते है।

माँ शैलपुत्री

प्रथम दिन माँ शैलपुत्री की पूजा पुरे देश में होती है। इनको माँ पार्वती के नाम से भी जाना जाता है। में के इस रूप को सरे कष्टों का नाश करने वाला मानते है। लोग कहते है की दुर्गा माँ के इस रूप की पूजा अर्चना करने से हमारे सारे कष्ट खत्म हो जाते है।

माँ ब्रम्हचरिणी

ब्रम्ह यानि की तपस्या का आचरण करने वाले माँ के इस रूप को ब्रम्ह्चारिणी के नाम से जानते है। इनके दाये हाथ में जप की माला और बाएँ हाथ में सदा कमंडल रहता है। माँ के इस रूप की पूजा करने से बुरी भावना खत्म हो जाती है।

माँ चंद्रघंटा

तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। माँ के इस रूप में उनकी दस भुजाएँ और सिर पर आधा चन्द्रमा रहते है। इस रूप की पूजा से लोग साधना में निपुण हो जाते है।

माँ कूष्माण्डा

देवी माँ के इस रूप में आठ भुजाएं है इसलिए तो इन्हे अष्टभुज देवी कहा गया है। माँ के इस रूप की पूजा करने से सभी रोग दूर होते है साथ ही आयु और यश भी बढ़ता है।

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माँ स्कंदमाता

माँ दुर्गा राक्षसों का वध करने के लिए शेर पर सवार हुई थी। माँ के इस रूप की पूजा से सुख और शांति मिलती है।

माँ काव्यायिनी

माँ काव्यान ऋषि के घर जन्म ली थी इसलिए इनका नाम कव्यायिनी पड़ा। माँ के इस रूप की पूजा करने से सरे शत्रुओ का नाश होता है और कुंवारी लड़कियों का विवाह भी होता है।

माँ कालरात्री

माँ के इस रूप की पूजा से भक्तो का सारा काम शुभ होता है।

माँ महागौरी

माँ का ये रूप सौभाग्य को दर्शाता है। इस रूप की पूजा से स्त्रिया सौभाग्य को प्राप्त करती है।

माँ सिद्धिदात्री

माँ के इस रूप की पूजा से सारी सिद्धियो की प्राप्ति होती है।

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