Thursday, January 18

क्या आपको पता है मोरपंख में होता है नवग्रहों का वास, जानें ये 9 उपाय

मोरपंख जिसे देखने मात्र से ही मन को मोह लेता है, जो अत्यंत सुंदर दिखाई देता है। क्या आपको पता है मोरपंख हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है की मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास होता है और अगर हम अपने धर्म ग्रंथों की माने तो इसके बारे में पक्षी शास्त्र में वर्णित है कि भगवान शिव ने मां पार्वती को मोर पंख के महत्व को बताते हुए वर्णन किया है कि प्राचीन काल में संध्या नाम का एक असुर हुआ करता था, जो बहुत शक्तिशाली और तपस्वी असुर था। कहा जाता है की गुरु शुक्लाचार्य के कारण संध्या असुर देवताओं का शत्रु बन गया था। संध्या असुर ने कठोर तप करके शिवजी और ब्रह्मा जी दोनों को ही प्रसन्न कर उसने कई शक्तियां वरदान के रूप में मांग ली तथा उसके बाद संध्या असुर भगवान विष्णु के भक्तों को सताने लगा।

संध्या असुर ने स्वर्ग पर भी अपना आधिपत्य कर लिया और साथ ही कई देवताओं को बंदी भी बना लिया था। जब किसी भी तरह देवता संध्या असुर को हरा नहीं पा रहे थे तब देवताओं ने एक योजना बनाई। योजना के अनुसार सभी देवता और सभी नौ ग्रह एक मोर के पंखों में विराजित हो गए जिससे वह मोर बहुत ज्यादा शक्तिशाली हो गया। फिर मोर ने विशाल रूप धारण करके संध्या असुर का वध कर दिया। तभी से मोर को भी पूजनीय और पवित्र माना जाने लगा।

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आपको बताना चाहेंगे की हमारे ज्योतिष शास्त्र में भी मोर के पंखों को विशेष स्थान दिया गया है। यदि विधिपूर्वक मोर पंख को स्थापित घर में स्थापित करे तो घर के वास्तु दोष दूर होते हैं और कुंडली के नौ ग्रहों के दोष भी शांत रहते हैं। घर का द्वार यदि वास्तु के विरुद्ध हो तो द्वार पर तीन मोर पंख लगाए।

शनि के लिए :  यदि आप शनिदेव की कृपा पाने चाहते है तो शनिवार को तीन मोर पंख लेकर पंख के नीचे काले रंग का धागा बांध दें फिर एक थाली में मोर पंखों के साथ तीन सुपारियां रखे दें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ शनैश्वराय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही तीन मिटटी के दीपक तेल सहित शनि देवता को अर्पित करें। गुलाब जामुन प्रसाद में चढ़ाएं। इससे शनि से संबंधी सारे दोष दूर होते है।

चंद्र के लिए :  चंद्र की कृपा पाने के लिए सोमवार को आठ मोर पंख लेकर पंख के नीचे सफेद रंग का धागा बांध दें। इसके बाद एक थाली में आठ मोर पंखों के साथ आठ सुपारियां  रख दे। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ सोमाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही पान के पांच पत्ते चंद्रमा को अर्पित करें और बर्फी का प्रसाद चढ़ाएं।

मंगल के लिए :  मंगल की कृपा पाने के लिए मंगलवार को सात मोर पंख लेकर पंख के नीचे लाल रंग का धागा बांध दें। इसके बाद एक थाली में सात मोर पंखों के साथ सात सुपारियां रखे दे। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ भू पुत्राय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’  इस मंत्र का जाप करें। साथ ही पीपल के दो पत्तों पर चावल रखकर मंगल ग्रह को अर्पित करें और बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं।

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बुध के लिए :  बुध की कृपा पाने के लिए बुधवार को छ: मोर पंख लेकर पंख के नीचे हरे रंग का धागा बांध दें। इसके बाद एक थाली में छ: मोर पंखों के साथ छ: सुपारियां रख दे। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ बुधाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही जामुन बुध ग्रह को अर्पित करें और केले के पत्ते पर रखकर मीठी रोटी का प्रसाद चढ़ाएं।

गुरु के लिए : गुरु की कृपा पाने के लिए गुरुवार को पांच मोर पंख लेकर पंख के नीचे पीले रंग का धागा बांध दें। इसके बाद एक थाली में पांच मोर पंखों के साथ पांच सुपारियां रख दे। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ बृहस्पते नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही ग्यारह केले बृहस्पति देवता को अर्पित करें और बेसन का प्रसाद बनाकर गुरु ग्रह को चढ़ाएं।

शुक्र के लिए : शुक्र की कृपा पाने के लिए शुक्रवार को चार मोर पंख लेकर पंख के नीचे गुलाबी रंग का धागा बांध दें। इसके बाद एक थाली में चार मोर पंखों के साथ चार सुपारियां रख दे। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ शुक्राय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही तीन मीठे पान शुक्र देवता को अर्पित करें और गुड़-चने का प्रसाद बना कर चढ़ाएं।

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सूर्य के लिए :  सूर्य की कृपा पाने के लिए रविवार के दिन नौ मोर पंख लेकर पंख के नीचे मैरून रंग का धागा बांध दें। इसके बाद एक थाली में नौ मोर पंखों के साथ नौ सुपारियां रख दे। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ सूर्याय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही दो नारियल सूर्य भगवान को अर्पित करें।

राहु के लिए : राहु की कृपा पाने के लिए शनिवार को सूर्य उदय के पहले ही दो मोर पंख लेकर पंख के नीचे भूरे रंग का धागा बांध दे। इसके बाद एक थाली में दो मोर पंखों के साथ दो सुपारियां रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ राहवे नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करे। साथ ही चौमुखा दीपक जलाकर राहु को अर्पित करें और कोई भी मीठा प्रसाद बनाकर चढ़ाएं।

केतु के लिए : केतु की कृपा पाने के लिए शनिवार को सूर्य अस्त होने के बाद एक मोर पंख लेकर पंख के नीचे स्लेटी रंग का धागा बांध दे। इसके बाद एक थाली में मोर के पंख के साथ एक सुपारी रख दे। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार ‘ॐ केतवे नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:’ इस मंत्र का जाप करें। साथ ही पानी के दो कलश भरकर राहु को अर्पित करें और फलों का प्रसाद चढ़ाएं।

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