आज है मृत्यु पंचक का आखिरी दिन ,भूलकर भी ना करें ये काम वरना आयेगा महासंकट

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद एवं रेवती कुछ ऐसे ही अशुभ नक्षत्रों के नाम है, जिन्हें काफी अशुभ माना जाता है। धनिष्ठा के प्रारंभ से लेकर रेवती के अंत तक का समय काफी अशुभ माना गया है, इसे पंचक कहा जाता है और यदि ये पंचक शनिवार के दिन से शुरू  हो तो उसे मृत्यु पंचक भी कहा जाता  है जो बहुत ही खतरनाक माना जाता है।

भारतीय ज्योतिष में पंचक को अशुभ माना गया है, पांच दिन के पंचक के दौरान कुछ विशेष काम करने की मनाही है। इसके अंतर्गत धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद, पूर्वा भाद्रपद व रेवती नक्षत्र आते हैं। इस बार 23 दिसंबर, शनिवार की सुबह लगभग 06 बजे से पंचक शुरू होगा, जो 27 दिसंबर, बुधवार की रात लगभग 09 बजे तक रहेगा। उज्जैन के ज्योतिषी पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, शनिवार से शुरू होने के कारण ये मृत्यु पंचक कहलाएगा।

इसीलिए आज हम आपको ऐसे ही कुछ कामों के बारे में बताएँगे जिन्हें पंचक में भूल कर भी नहीं करना चाहिए

पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता। विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। पंचक के  दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है। इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।

पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत या नव निर्माण नहीं करना चाहिए, ऐसा विद्वानों का कहना है। इससे धन की हानि और घर में क्लेश होता है।

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गरुण पुराण के अनुसार  पंचक में यदि किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसके  शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश (एक प्रकार की घास) से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए, तो पंचक दोष समाप्त हो जाता है।
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