मोक्षदा एकादशी के दिन इस शुभ मुहूर्त में करेंगे पूजन तो पायेंगे हजारों यज्ञों बराबर फल

हिन्दू धर्म में एकादशी के व्रत का बहुत ही महत्व है। भारत में एक वर्ष में कुल 24 एकादशियाँ मनाई जाती है जिसमे से  विष्‍णु पुराण के अनुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत हिंदू वर्ष की अन्‍य 23 एकादशियों पर उपवास रखने के बराबर है। मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत करने और विधि विधान से पूजा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है वे नरक की यातनाओं से मुक्‍त होकर स्‍वर्गलोक प्राप्‍त करते हैं और हिन्दू मान्‍यता के अनुसार जो मोक्षदा एकादशी का व्रत करता है उसके सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं और उसे जीवन-मरण के बंधन से मु्क्ति मिल जाती है, यानी कि उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इस साल 2017 मोक्षदा एकादशी गुरुवार यानि  30 नवंबर को मनाई जाएगी और इसका पारण 1 दिसम्बर को मनाया जा रहा है।

मोक्षदा एकादशी को दक्षिण भारत में वैकुण्ठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने महाभारत के प्रारम्भ होने से पूर्व अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था और इसीलिए इस दिन को भारतवर्ष में गीता जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।

मोक्षदा एकादशी व्रत की पूजा विधि मोक्ष एकादशी के दिन

सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्‍ण का स्‍मरण करके पुरे घर में गंगाजल से पवित्र करना चाहिए।

पूजन के लिए तुलसी की मंजरी,  धूप-दीप, फल-फूल, रोली, कुमकुम, चंदन, अक्षत, पंचामृत चाहिए।

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विघ्‍नहर्ता भगवान गणेश, भगवान श्रीकृष्‍ण और महर्ष‍ि वेदव्‍यास की मूर्ति या तस्‍वीर सामने रख ले। सबसे पहले भगवान गणेश को तुलसी की मंजरियां अर्पित करें. फिर विष्‍णु जी को धूप-दीप दिखाकर रोली और अक्षत चढ़ाएं और श्रीमदभागवद गीता का पाठ अवश्य करे।

पूजा पाठ करने के बाद व्रत-कथा सुननी चाहिए. इसके बाद आरती कर प्रसाद बांटें व्रत एकदाशी के अलग दिन सूर्योदय के बाद खोलना चाहिए।

मोक्ष एकादशी का शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार है

आरंभ तिथि : 29 नवंबर 2017 को रात्र‍ि 10 बजकर 59 मिनट।
समाप्‍त तिथि : 30 नवंबर 2017 को रात्र‍ि 9 बजकर  26 मिनट।
पारण तिथि : 1 दिसबंर सुबह 9 बजकर 39 मिनट तक।
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