गंगा की लहरों के बीच लिया अक्षय ऊर्जा का संदेश फैलाने का संकल्प

वाराणसी : सेंटर फॉर एन्वॉयरोंमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) ने अक्षय ऊर्जा के संदेश को प्रसारित करने और बनारस के विकास में इस वैकल्पिक ऊर्जा के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करने के लिए सैकड़ों नागरिकों के सक्रिय समर्थन व उत्साह से आज अस्सी घाट पर अक्षय ऊर्जा दिवस (रिन्युबल एनर्जी डे) पूरे धूमधाम से मनाया। इस आयोजन का मकसद अक्षय ऊर्जा के लाभों से लोगों को अवगत कराना और इसके जरिये सबों तक चौबीसों घंटे और सातों दिन बिजली मुहैया कराना है। इस पहल के जरिये नागरिकों ने अक्षय ऊर्जा के रास्ते पर चलने की मांग रखी ताकि वाराणसी को भारत का पहला अक्षय ऊर्जा से प्रकाशवान शहर बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।
इस मौके पर सीड के प्रोग्राम डायरेक्टर अभिषेक प्रताप ने कहा कि यह दिन वाराणसी को भारत के पहले पूर्ण रूप से अक्षय ऊर्जा चालित स्मार्ट सिटी के लक्ष्य को पूरा करने के लिहाज से एक बेहतरीन अवसर है। वाइब्रेंट वाराणसी की पर्यावरण संबंधी चेतना और जागरूकता की ही यह मिसाल है कि शहर के विविध इलाकों के सैकड़ों नागरिकों ने चंद हफ्तों के भीतर अपने घर की छत को सोलर ऊर्जा उत्पादन हेतु समर्पित करने की प्रतिज्ञा ली है। दरअसल बनारस को पर्यावरण रक्षा के साथ-साथ विशाल आधारभूत संरचना के विकास के जरिये आमूल बदलाव की जरूरत है और ऐसे में अक्षय ऊर्जा संसाधन जैसे सोलर एनर्जी लागत प्रभावी यानी किफायती ढंग से इस बदलाव को संभव बना सकते है।

सीड एक सिटिजन कैंपेन प्लेज माइ रूफटॉप चला रहा है जो केंद्र व राज्य सरकार द्वारा वाराणसी को अक्षय ऊर्जा संसाधनों पर आधारित भारत के पहले स्मार्ट सिटी बनाने के लक्ष्य में सक्रिय सहायता दे रहा है। हाल ही में सीड ने वाइब्रेंट वाराणसी: ट्रांस्फॉरमेश्न थू् सोलर रूफटॉप नाम से जारी की है, जिसमें अभी वाराणसी शहर के कुल 8 प्रतिशत छत की जगह का इस्तेमाल करके करीब 676 मेगावाट सोलर बिजली पैदा करने की संभावना को रेखांकित किया गया है। इस रिपोर्ट में सोलर रूफटॉप के एक रोडमैप का जिक्र किया गया है, जिसके तहत शहर में करीब 300 मेगावाट की सोलर एनर्जी को दस वर्षों में ग्रिड में समाहित किया जा सकता है और इससे आगामी एक दशक में करीब 1490 मिलियन रुपये की बचत की जा सकती है। सोलर एनर्जी यानी सौर ऊर्जा एक सततशील, सस्ता और बिना प्रदूषण का ऐसा विकल्प है जिससे बनारस में बढ़ते ऊर्जा संकट से निबटा जा सकता है।

इस विशेष मौके पर समाजसेवी डॉ० दयाशंकर मिश्रा (दयालु ) ने कहा कि यह देखना वाकई सुखद है कि इतने सारे लोगों ने हमारे पर्यावरण की रक्षा के लिए अक्षय ऊर्जा जैसे स्वच्छ उपाय के संदेश को फैलाने का बीड़ा उठाया है। अक्षय ऊर्जा का विकास और प्रोत्साहन हमारे वातावरण की रक्षा के लिहाज से न केवल जरूरी है, बल्कि इससे बेहद लागत प्रभावी ढंग से सबों तक हर समय बिजली की सुविधा मुहैया करायी जा सकती है। राज्य सरकार वास्तव में महंगे और प्रदूषणकारी पारंपरिक उर्जा स्रोतों के ऊपर निर्भरता को कम करने के लिए सौर ऊर्जा जैसे अक्षय संसाधनों के प्रोत्साहन के लिए प्रतिबद्ध है और इस प्रतिबद्धता को जमीन पर उतारने के लिए कई योजनाएं सामने आ रही हैं।

इस आयोजन में वाराणसी शहर के ढेरों गणमान्य व प्रबुद्ध जनों ने युवाओं और छात्रों के साथ सक्रिय भागीदारी की, जिसका स्पष्ट उद्देश्य यह है कि केवल अक्षय ऊर्जा संसाधनों को अपना कर ही शहर का विकास किया जा सकता है और बनारस को भारत के मानचित्र पर गौरवशाली स्थान दिलाया जा सकता है।

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