इन महिलाओं को शादीशुदा होने के बाद भी माना जाता है कुंवारी, जानें क्‍या है इसके पीछे का कारण

हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की किसी लड़की की शादी एक बार हो जाए तो उसे कुंवारी नहीं कहा जाता है| लेकिन हमारे पुराणों में कुछ ऐसी महिलाओं का  भी जिक्र किया गया है, जिन्हें शादीशुदा होने के बावजूद कुंवारी माना गया है। अब आप यह सोच रहे होंगे कि जब एक बार शादी हो गई तो महिला कुंवारी कैसे मानी जाएगी? आपका सोचना बिल्कुल सही है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसी ही महिलाओं के बारे में में जो शादीशुदा होने के बाद भी कुंवारी मानी जाती हैं।

अहिल्या

अहिल्या जो की गौतम ऋषि की पत्नी थी |एक दिन जब गौतम ऋषि सुबह स्नान और पूजन के लिए घर से बाहर गए उसी वक्त इंद्रदेव  उनके रूप में उनके आश्रम में आ गये और इंद्र ने अहिल्या के साथ संबंध बनाए और उसी दौरान ऋषि गौतम भी आश्रम  लौट आए। और अहिल्या को इस रूप में देखकर वह क्रोधित हुए और उन्होंने अहिल्या को पत्थर बनने का श्राप  दे दिया |अहिल्या ने तब  अपने पति को सारी सच्चाई बताई जो की  अहिल्या के अपने पति के प्रति पूरी तरह से निष्ठावान होने का संकेत था  और यही कारण था कि उन्हें कौमार्य (पवित्र) माना गया है।

मंदोदरी

मंदोदरी जो की रावण की पत्नी थी पुराणों के अनुसार मंदोदरी की सुंदरता देखकर रावण उनपे मोहित हो गया था और उसने उनसे  विवाह किया था| मंदोदरी बहुत बुद्धिमान थीऔर सदैव रावण को सही-गलत के बारे में समझाया, लेकिन उसने मंदोदरी की कभी कोई बात नहीं मानी।परन्तु रावण की मौत के बाद जब श्रीराम ने जब विभीषण को मंदोदरी को आश्रय देने के लिए कहा तो उन्होंने स्वीकार कर लिया |मंदोदरी के इसी गुण के कारण उन्हें महान और पवित्र माना गया है|

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कुंती

कुंती जो की पांडू की पत्नी थी और इनका और पांडु का विवाह स्वयंवर में हुआ था। पांडु को शाप था कि वह अगर वो किसी भी स्त्री को स्पर्श करेंगे तो उसकी मृत्यु हो जाएगी। और इसी वजह से  पांडु आए दिन इस चिंता में डूबे रहते थे।परन्तु  कुंती को ऋषि दुर्वासा ने एक मंत्र दिया था। मंत्र ऐसा था कि उसके उपयोग से वह जिस भी देवता का ध्यान कर जप करेंगी, उनसे उन्हें पुत्र की प्राप्ति होगी।इसलिए कुंती ने धर्म देव से युधिष्ठिर, वायुदेव से भीम और इंद्र देव से अर्जुन को पुत्र के रूप में पाया| इसीलिए कुंती को कौमार्य (पवित्र) माना गया है।

द्रौपदी

पुराणों के अनुसार पांच पतियों की पत्नी बनने वाली द्रौपदी का भी व्यक्तित्व काफी मजबूत था। अपनी खुशी के विपरीत जाकर कुल और राज्य के भविष्य के लिए द्रौपदी ने पांच पांडवों की पत्नी होने का निर्णय लिया।उनके इसी कर्तव्य पालन की वजह से सदा ही उन्हें पवित्र माना गया है |

 

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