Friday, December 15

इन्‍हें देखकर कौन कहेगा कि इंसानों के रूप में ये जानवर है, इनकी दर्दनाक हरकतें देख सिहर जाएंगे आप

त्योहार के दिन हम सभी आपस में मिलकर एक साथ खुशियां मनाते है। लेकिन कुछ त्योहार ऐसे होते हैं जिनमें रिवाजों के नाम पर खुले आम जानवरों के साथ बर्बरता की जाती है। जो की आस्था और ईश्वर के नाम पर किसी बेजुबान की बलि देना है, लेकिन नेपाल के देवपोखरी के त्योहार पर अंधी आस्था में डूबे लोग पूजा के नाम पर जानवरों के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर देते हैं।

नेपाल के देवपोखरी त्योहार पर हर साल खोकन गांव में बड़ी ही धूम-धाम मनाया जाता है, और साथ ही संवोदनहीन होकर बड़ी क्रूरता से। यहां संवेदनाएं केवल मासूम बच्चों की आंखों में होती हैं, जो बेजुबान जानवरो पर हो रहे क्रूरता को हर साल अपनी आंखों से देखते हैं।

संवेदनाशून्य है देवपोखरी त्योहार

लगभग 900 सालों से नेपालियों का ये देवपोखरी त्योहार मनाया जा रहा है। इस त्योहार में सबसे खौफनाक दृश्य एक प्रतियोगिता है जो एक पोखरे में होता है।

 

इसमें गांव के बीचों बीच रुद्रायनी मंदिर के करीब एक पोखर है जिसे बहुत ही पवित्र माना जाता है। पवित्र तालाब में 5 महीने की एक बकरी को फेंक देते है फिर उसके साथ-साथ पुरुषों का एक समूह पानी में उतरता है।

इसमें बकरी को पानी से बाहर निकालना होता है, जो कोई भी बकरी को पहले पानी से बाहर निका;लता है वो प्रतियोगिता जीत जाता है और पुरष्कार के रूप में त्योहार के जुलूस का नेतृत्व उसे सौंप दिया जाता है।

सुनने में ये त्योहार भले ही समान्य लगे लेकिन इस त्योहार का खौफनाक हिस्सा अब शुरू होता है। पानी में फेंकी गई बकरी को निकालने के लिए इन लोगों में काफी खींचातानी होती है।

जहाँ कोई बकरी को फेंकता देता है तो कोई बकरी के गर्दन को कसकर पकड़ लेता है और तो और कोई अपनी ताकत दिखने के लिए उसका एक पैर पकड़कर हवा में उठा देता है। कोई सर को दबोचता है तो कोई गर्दन को और ये सब करीब 45 मिनट तक चलता रहता है. एक बकरी के बच्चे की जान जाने में इतना देर काफी है।

असल में बकरी पर की जाने वाली इस हिंसा का कारण ही उसे कमजोर व मारना ही होता है। इतनी मार खाकर बकरी कमजोर हो जाती है और अपनी जान बचाने के लिए उछल कूद नहीं करती और यही वो समय होता है।

जब बकरी को कोई भी आसानी से तालाब से बाहर निकाल सकता है।बलि देने की प्रथा में एक जानवर को बलि से पहले पूजा करने के बाद तब एक ही झटके में उसको मुक्ति दे दी जाती है लेकिन यहां इस बकरी को तो तड़पा तड़पा कर मारा जाता है।

 

क्या ऐसा करने का ये कारण वाजिब है?

अपने मनोरंजन के लिए भगवान के नाम पर यह त्योहार हर साल इसी तरह अमानवीय तरीके से मनाया जाता है। लेकिन इसे मनाने के पीछे जो कारण यहां के स्थानीय लोग बताते हैं वो थोडा अजीब हैं कि तालाब में एक राक्षस रहता था, जिसकी वजह से कई लोगों की मौत तालाब में डूबकर होती थी। तालाब को शांत करने के लिए इस त्योहार का आय़ोजन किया जाता है, जिससे किसी की मौत न हो।

कई एनिमल राइट्स संस्थाओं द्वारा इस त्योहार को अमानवीय करार कर किया गया है, इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है. इस त्योहार को बैन करने के लिए कई सारी ऑनलाइन पिटीशन भी फाइल की गई हैं। पेटा भी इस मामने में नेपाल के एनिमल राइट्स संस्थाओं का साथ दे रही है।

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