पीएम मोदी के मन की बात इस बार कहा कुछ खास, स्टूडेंट्स को भी दिये कई अहम सलाह

0 views

पीएम मोदी ने रविवार को 30वीं और यूपी चुनाव के नतीजे आने के बाद पहली बार मन की बात की. पीएम मोदी ने बोर्ड एग्जाम की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स को कई अहम सलाह देते हुए इस कार्यक्रम की शुरुआत की. इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बांग्लादेश को उसके स्वतंत्रता दिवस को शुभकामनाएं देते हुए उसे मजबूत सहयोगी बताया. पीएम ने अमर शहीदों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को याद करते हुए उन्हें देश के लिए प्रेरणा स्रोत बताया।

चंपारण सत्याग्रह का जिक्र

पीएम ने ‘मन की बात’ में कई मुद्दों पर विस्तार से बात की. उन्होंने बच्चों की चल रही परीक्षाओं से लेकर चंपारण सत्याग्रह, न्यू इंडिया, ट्रैफिक नियम, डिजिधन योजना, भोजन की बर्बादी, डिप्रेशन और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बात की. पीएम ने चंपारण सत्याग्रह का जिक्र करते हुए कहा।

इस आंदोलन से हमें संघर्ष और सृजन की प्रेरणा मिलती है. यह आंदोलन देश में एक बड़ा बदलाव था. अंग्रेज तक गांधी के इस तौर-तरीके को नहीं समझ पाए थे. एक तरफ जहां वह आंदोलन से जेल भर देते थे वहीं दूसरी तरफ रचनात्मक कार्यों की तरफ भी मुड़ जाते थे. अंग्रेज सल्तनत के साथ असहयोग आंदोलन किया. आज देश चंपारण सत्याग्रह का शताब्दी वर्ष मना रहा है. हमें सर्वजन हिताय के मूल मंत्र को लेकर देश के लोगों की मदद करने का संकल्प लेना चाहिए।

न्यू इंडिया पर की बात

पीएम मोदी ने अपने ‘न्यू इंडिया’ के बारे में बताया. पीएम ने कहा कि न्यू इंडिया कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं है, यह एक आंदोलन है. यह सवा सौ करोड़ लोगों का सपना है. सभी देशवासी अगर संकल्प करें और मिलकर कदम उठाते चलें, तो न्यू इंडिया का सपना हमारे सामने सच हो सकता है। हर नागरिक अपने नागरिक धर्म और कर्तव्य का पालन करे, यही अपने आप में न्यू इंडिया की एक अच्छी शुरुआत बन सकता है. पीएम ने कहा, ‘मैं आपको निमंत्रण देता हूं कि स्वराज से सुराज की इस यात्रा में हम सभी जीवन को अनुशासित कर, संकल्पबद्ध करके जुड़े।’

भोजन बरबाद होने से रोकें

पीएम मोदी ने लोगों से अपील की कि खाने की बरबादी न करें, उन्होंने कहा कि लोगों ने इस संबंध में अपनी चिंता से उन्हें अवगत कराया है. पीएम ने कहा कि लोग खाना बरबाद न करें, थाली में जूठन न छोड़ें. पीएम ने कहा, ‘मैं इस विषय पर ज्यादा आग्रह नहीं कर रहा हूं, लेकिन मैं चाहूंगा कि ये जागरूकता बढ़नी चाहिए. हम उतना ही लें, जितना खाना है. उन्होंने कहा कि हम प्लेट में उतना ही खाना लें जितना खा सकें, खाना बरबादद ना करें।”

Share this on

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *