जानें क्या है धारा 377?, समलैंगिकता पर आखिर कितनी सजा का है प्रावधान

समलैंगिकता पर चर्चा ना जाने कब से चल रही है। एक अरसा हो गया उन्हे अपने हक के लिए लड़ते हुए। सवाल ये उठता है कि आखिर समलैंगिकता कहा तक सही या गलत है। क्या ये वाकई ये किसी व्यक्ति के ऊपर है कि वो समलैंगिक हो या ना हो। इन सब बातों पर एक बार फिर से सुनवाई हो रही है। आम बोलचाल में लोग समलैंगिक को LGBT के नाम से जानते हैं। इसका पूरा नाम है, Lesbian, Gay, Bisexual और Transgender. और कई दूसरे लोग इसे queer समुदाय के नाम से भी जानते है। queer मतलब होता है अजीब होना। अब गार अगर कोई समलैंगिक है तो फिर वो अजीब कैसे हो सकता है।

आपको बता दें कि सेक्शन 377 के तहत  अगर कोई स्‍त्री-पुरुष आपसी सहमति से भी अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते हैं तो इस धारा के तहत 10 साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। किसी जानवर के साथ यौन संबंध बनाने पर इस कानून के तहत उम्रकैद या 10 साल की सजा एवं जुर्माने का प्रावधान है। इस धारा के अंतर्गत अपराध को संज्ञेय बनाया गया है। इसमें गिरफ्तारी के लिए किसी प्रकार के वारंट की जरूरत नहीं होती है।

शक के आधार पर या ये कहकर कि गुप्त सूचना मिली है पुलिस किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है। धारा-377 गैरजमानती अपराध है। हैरानी होती है ये जानकर कि जिस धारा 377 पर कई सालों से देशभर में बहस छिड़ी है, उसके तहत अप्राकृतिक संबंध बनाने के मामले में पिछले लगभग 150 सालों में सिर्फ 200 लोगों को ही दोषी करार दिया गया है।

नाज फाउंडेशन ने 2009 की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने ऐत‍िहासिक फैसले में कहा कि दो व्‍यस्‍क आपसी सहमति से एकातं में समलैंगिक संबंध बनाते है तो वह आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा कोर्ट ने सभी नागरिकों के समानता के अधिकारों की बात की थी। हालाकि सुप्रीम कोर्ट ने इस सुनवाई को 2013 में खारिज कर दी।

LGBT समुदाय का मानना है कि उन्हे पूरी आजादी है कि वो भी आम व्यक्ति की तरह जिन्दगी जीए और ये लड़ाई उसी के लिए है।

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