आइए जानें, कौन हैं छठी मैया और क्यों इनके साथ की जाती है सूर्यदेव की पूजा

13 और 14 नवंबर को छठ का पर्व मनाया जाएगा और यह उत्तर भारत के बिहार राज्य का सुप्रसिद्ध पर्व हैं और यह तीन दिन तक मनाया जाता हैं और यह कल यानि 11 नवंबर से नहाय खाय से शुरू होता हैं और दूसरे, तीसरे दिन पूरे दिन निर्जला उपवास किया जाता है| तीसरे दिन की शाम और उससे अगली सुबह पवित्र नदी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है| बता दें हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह पर्व हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्टि को मनाया जाता हैं|

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छठी मैया कौन थी

पौराणिक मान्यता के मुताबिक पहली बार भगवान राम और सीता माता ने छठी मैया की पुजा की थी| धार्मिक ग्रंथ ब्रह्मवैवर्तपुराण के मुताबिक हिंदू धर्म में आदिशक्ति के नौ रूपों में से षष्ठी देवी को ही छठ मैया कहा जाता है और इन्हें भगवान ब्रह्मा जी की मानास्पुत्री कहा जाता है| छठी मैया निःसंतान दंपत्तियो की छोली भरती हैं|

इस पर्व में सूर्य भगवान के साथ छठ मैया की भुजा की जाती हैं| ऐसे में सवाल उठता हैं कि आखिर क्यों सूर्य भगवान के साथ छठ मैया की पुजा क्यो जाती हैं| दरअसल शास्त्रो के मुताबिक छठी देवी को अंश प्रदान करने वाली माना गया हैं और सूर्य देव भी प्रकृति से जुड़े हुये हैं| छठ पर्व में प्रकृति और अंश दोनों को पाने की कामना की जाती हैं और यह छठ के लोकगीतों में भी देखने को मिलती हैं|

उदाहरणस्वरूप ‘अन-धन सोनवा लागी पूजी देवलघरवा हे, पुत्र लागी करीं हम छठी के बरतिया हे’| इस तरह से महिलाएं छठ पुजा के दौरान छठी मैया से संतान को सुखी जीवन के लिए प्रार्थना करते हैं और सूर्य देव से अन्न, धन और संपत्ति आदि प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं|

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