नवरात्रि कलश विसर्जन: जानें, आखिर कैसे हटाएंं कलश, नारियल और दीया

चैत्र नवरात्र में देवी माँ के पूजा के साथ कलश की स्थापना की जाती हैं और नवरात्रि के समापन पर कलश को विसर्जित किया जाता हैं| हालांकि यह घड़ी बहुत मुश्किल होती हैं क्योंकि यह वहीं दिन होता हैं, जब माता रानी को हमे घट के रूप में अपने घर से भेजना होता हैं| ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि नवरात्रि के समापन के बाद कलश का विसर्जन कैसे करे और इसके साथ ही नारियल और दीया को कैसे हटाये| इस विधि को उत्तर पूजन विधि कहते हैं| इस दिन माता रानी को अनाज का भोग लगाए|

आपसे से जितना हो सके, उतना अन्न बाहर निकाल यानि की दान कर दीजिये| अब जो अन्न आपने भोग माँ को लगाया हैं, उसे ग्रहण करे| अब सभी परिवार के सदस्य माता रानी की आरती और सकीर्तन कीजिये और बोले की माता रानी आप हमारे यहाँ जितनी दिन रही, उतने दिन आपकी कृपा हमारे ऊपर रही और अब जिस कलश के रूप में हमारे यहाँ आयी, अब आप यहाँ से प्रस्थान कीजिये| अब चावल को अपने बाएँ हाथ में रखे और अपने दाहिने हाथ से चावल को माता के रूप में छोड़ दीजिये|

अब मिट्टी के दीये,  फूल-माला, अनाज इत्यादि को एक साथ किसी नदी या तालाब में विसर्जित कर दे| इसके बाद कलश और नारियल के अंदर का पैसा, सुपारी अपने तिजोरी में रख दे और पत्तियों को अलग थैली में रख दे| माता का वस्त्र दान कर दे और माता के सभी श्रृंगार को अपने पास ही रख ले और कलश के पानी को अपने पूरे घर में छिड़क दे| नारियल को किसी कपड़े में बांध कर अपने घर के ईशान कोण, उत्तर और पूरब दिशा की ओर रख दे|

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इसके बाद आपने जो अष्टमी को वस्त्र, फल आदि चढ़ाया हैं तो उसे किसी पंडित को दान कर दे क्योंकि दान करना सबसे पुण्य का काम माना जाता है| दरअसल दान ऐसी चीजों का करे जो सामने वाले व्यक्ति के इस्तेमाल में आयें, तभी आपको दान का फल मिलेगा| अब हवन के राख़ को आप अपने गमले में डाल दे, पेड़ो को खाद्य मिल जाएगा|

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