कार्तिक पूर्णिमा: स्नान से लेकर रात तक करे ये काम, लक्ष्मी प्रसन्न होकर बरसाएंगी धन

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा  का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं।जिसमे कार्तिक पूर्णिमा का शास्त्रों में बहुत अधिक महत्व दिया गया है |इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 4 नवम्बर यानि की शनिवार को मनाई जाएगी | ऐसी मान्यता है की जो भी व्यक्ति कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुरे विधि विधान से गंगा स्नान  कर पूजा अर्चना करता है उसका जीवन सुख संपत्ति एवं धन धन्य से भर जाता है और उसे संसार की हर विपदा से मुक्ति मिल जाती है |

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कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पुर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अंत किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे। ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फाल मिलता है।

शास्त्रों में वर्णित है कि कार्तिक पुर्णिमा के दिन पवित्र नदी व सरोवर एवं धर्म स्थान में जैसे, गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि पर व्यक्ति को बिना स्नान किए नहीं रहना चाहिए उसके बाद विधिवत पूजा करे ,हवन करे ,लक्ष्मी जी के स्त्रोत का पाठ करे  और  सूर्यास्त के बाद तुलसी में दीपदान करने के बाद  रात में चन्द्रमा को अर्ध्य देना ना भूले |

कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान, दीप दान, हवन, यज्ञ आदि करने से सांसारिक पाप और ताप का शमन होता है। इस दिन किये जाने वाले अन्न, धन एव वस्त्र दान का भी बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन जो भी दान किया जाता हैं उसका कई गुणा लाभ मिलता है। मान्यता यह भी है कि इस दिन व्यक्ति जो कुछ दान करता है वह उसके लिए स्वर्ग में संरक्षित रहता है जो मृत्यु लोक त्यागने के बाद स्वर्ग में उसे पुनःप्राप्त होता है।

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