आज है कालभैरव अष्‍टमी, इस विधी से करेंगे पूजन तो दूर हो जाएंगे सारे कष्‍ट

वेदों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान शिव ने भैरव रूप में अवतार लिया था और इस दिन भगवान शिव के भैरव रूप की पूजा की जाती है। इस दिन को लोग काल भैरवाष्टमी के रूप में याद रखते है, जो इस वर्ष के 10 नवंबर और 11 नवम्बर दोनों दिन पड़ रही है। बता दे की इस दिन श्रद्धालु लोग श्री महाकाल भैरव अष्टमी, श्री महाकाल भैरव जी की जयंती, काल अष्टमी, भैरव अष्टमी आदि नामो से बुलाते है और बहुत श्रद्धा भाव से पूजा भी करते है।

यूं तो कालभैरव को खुश करना बेहद आसान है, लेकिन जब वे रुष्ट हो जाते है तो मनाना बहुत मुश्किल हो जाता है। शिव पुराण की शतरूद्र संहिता के अनुसार इस दिन खुद भगवान शिव, काल भैरव रूप में अवतरित हुए। भक्तो का मानना है भगवान शिव के दो रूप हैं- पहला वो, जो भक्तों को अभयदान देते है अर्थात विश्वेश्वर रूप और दूसरा जो दुष्टों को दंड देते है काल भैरव के रूप में।

ऐसा माना जाता है की विश्वेश्वर स्वरूप अत्यंत सौम्य, शांत व अभय प्रदान कराने वाला है वहीं दूसरी और भैरव स्वरूप अत्यंत रौद्र, विकराल और प्रचंड है। वेदों के अनुसार सृष्टि की रचना ब्रह्मा जी, सृष्टि के पालनहार विष्णु जी और सृष्टि के संहार की जिम्मेदारी शिव जी को दी गयी है। वेदों के अनुसार भगवान शिव ने भैरव बाबा को काशी का भार सौंपा है और कहा कि मेरी जो मुक्तिदायिनी काशी नगरी है, वह सभी नगरो से श्रेष्ठ है। आपको बताना चाहेंगे की काल भैरव पूजन काशी नगरी में काफी प्रसिद्ध है जहाँ उनके अनेक प्रसिद्ध मंदिर भी हैं। उज्जैन एवं मेहंदीपुर बालाजी (राजस्थान) में भी भैरव जी का मंदिर काफी लोकप्रिय है।

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भैरव औघड़ बाबा कमर में लाल वस्त्र धारण रहते हैं, भगवान शिव के तरह  ही भस्म लपेटे रहते हैं और काल भैरव बाबा की मूर्तियों पर लाल सिंदूर का चोला चढ़ाया जाता है। बताना चाहेंगे की इस काल भैरव अष्टमी को बाबा कालभैरव को प्रसन्न करने के कुछ बेहद सरल उपाय बताए गए है जिन्हे करने के बाद निश्चित रूप से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। चूंकि काल भैरव का प्रिय वार रविवार है और कहा जाता है की इस दिन आप एक रोटी पर अपनी तर्जनी और मध्यमा अंगुली से तेल में डुबोकर लाइन खींचें और उसके बाद इसे किसी काले कुत्ते को खिला दें। माना जाता है की यदि कुत्ता यह रोटी खा लें तो समझिए आपको कालभैरव का आशीर्वाद मिल गया।

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इस दिन गंगा में स्नान करना बहुत शुभ होता है, महाकाल भैरव की पूजा, जप और दान आदि करने से विशेष पुण्य मिलता है। महाकाल भैरव को दूध और हलवा अत्यंत प्रिय है इसलिए कई भक्त इन्हें यह प्रसाद चढ़ाते हैं। भैरव बाबा का दिन रविवार तथा मंगलवार माना जाता है। इन दोनों दिनों में भैरव बाबा की पूजा-अर्चना करने से भूत-प्रेत इत्यादि अन्य प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।

 

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