शादी के बाद महिलाओं का बिछिया पहनने का क्‍या है कारण, जानकर बाग-बाग हो जाएगा आपका दिल

सामाजिक मान्‍यताओं के अनुसार शादी के बाद प्रत्येक महिलाओं का बिछिया पहननी चाहिए। इसे पहनना शुभ माना जाता है। आमतौर पर बिछिया चांदी की होती है। शादीशुदा महिलाओ के बीच सोलह श्रृंगार का विशेष महत्‍व है शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना गया हैं और इन सोलह श्रृंगारों में 15 वें पायदान पर पैर की अंगुलियों में बिछिया पहने का रिवाज है।

बिछिया हर महिला के शादीशुदा होने की निशानी है और साथ ही यह महिलाओं के सोलह श्रृंगार में से एक है। शादी के सात फेरों के बाद महिला को पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनाई जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसके वास्‍तविक पीछे कारण क्या है?

शादी के बाद महिला बिछिया तब तक पहनती है, जब तक उसका पति जीवित रहता है। यह उन श्रृंगार में से एक है, जिसे शादी के बाद ही किया जाता है। महिलाओं का बिछिया पहनना केवल यह नहीं बताता है कि वे शादी शुदा हैं बल्कि इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है। आइए जानते हैं वे सभी कारण जिनके कारण महिलाओं का बिछिया पहनना अच्‍छा माना जाता है|

आयुर्वेद में बिछिया के इस महत्व को समझा गया है और यही वजह है कि हमारी संस्कृति में विवाहित महिलाओं के लिए इसे पहनने का विधान है। आयुर्वेद की मर्म चिकित्सा में महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए बिछिया के महत्व को माना गया है| साइटिक नर्व की एक नस को बिछिया दबाती है जिस वजह से रक्त का प्रवाह तेज होता है और सभी जगह रक्त का प्रवाह ठीक होता है।

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सेहत की नज़र से देखा जाए तो दोनों पैरों की उंगलियों में बिछिया पहनने से मासिक चक्र नियमित रहता है। यह बात भारतीय वेदों में भी लिखा है| इसके अलावा बिछिया एक्यूप्रेशर का भी काम करती है। इससे तलवे से लेकर नाभि तक की सभी नाड़ियां सुचारू रूप से काम करते है| हमेशा से माना गया है की चांदी एक अच्छी सुचालक है इ‍सलिए यह पृथ्वी की ध्रुवीय ऊर्जा को ठीक करके शरीर तक पहुंचाती है जिससे पूरा शरीर तरोताजा और स्वस्थ हो जाता है।

पैरों में  चांदी की बिछिया पहनने का एक महत्व ये भी है की चांदी हमारे शरीर के लिए एक अच्छा सुचालक है और ये पृथ्वी की ध्रुवी उर्जा को खीचकर हमारे शरीर तक पहुचता है जिससे हमारे शरीर में ताजगी बनी रहती है |

डॉक्टरो के मुताबिक बिछिया पहनने का कनेक्शन प्रेग्नेंसी से भी है। पैर की दूसरी अंगुली की तन्त्रिका का सम्बन्ध गर्भाशय से होता है। साथ ही वह तंत्रिका हृदय से होकर गुजरती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन सही तरह से काम करता है और हमारा शारीर सही ढंग से काम करता है| येही वेदों में भी लिखा है|

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