ये है विश्व की सबसे बड़ी टैक्स फ्री रसोई, जहां हर रोज एक लाख से भी ज्यादा लोग खाते हैं फ्री में खाना

अगर आपके अंदर सेवा भावना हैं या आप गरीबो की मदद करना चाहते हैं तो उन्हें बस खाना खिला दीजिये| इससे सुकून ही नहीं बल्कि ऊपर वाले की मैहर भी आप पर बनी रहेगी| कहते हैं सबसे बड़ा धर्म गरीबों की मदद करना होता हैं| आपने लंगर का नाम सुना होगा| लंगर का नाम आते ही हमें गुरुद्वारे की याद आती हैं| क्या आपको मालूम हैं की दुनिया में एक ऐसी भी रसोई है? जहां एक घंटे में 25 हजार रोटियां बनाई जाती हैं और रोज लाखों लोग मुफ्त खाना खाते हैं। अगर नहीं तो आइए हम आपको इतने बड़े रसोई के बारे में बताते हैं….

अमृतसर स्थित वर्ल्ड फेमस गुरुद्वारा स्वर्ण मंदिर में इतनी विशाल रसोई है। जहां गुरुद्वारा के विशाल परिसर में मौजूद हाल में रोजाना 70 हजार से एक लाख तक लोग मुफ्त लंगर ग्रहण करते हैं। छुटिटयों के दिनों में ये आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए की खाने का स्वाद भी इतना लजीज होता है। की लोग खुद को खाने से रोक नहीं पाते हैं| स्वर्ण मंदिर में 24 घंटे लंगर चलता है। शुद्ध शाकाहारी भोजन तैयार करने वाले लोग यहां के कर्मचारी नहीं, ब्लकि सेवादार होते हैं|

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जो कि सेवाभाव से श्रद्धालुओं के लिए लंगर तैयार करते हैं। और बाद में उन्हें पंक्तियों में बैठाकर लंगर ग्रहण करवाते हैं। सब कुछ प्रेम भाव से होता है। गुरु रामदास लंगर के मैनेजर का कहना है कि भोजन में क्या-क्या पकेगा, यह पहले से तय किया जाता है। जैसे ही लोग खाने के लिए पंक्तियों में बैठते हैं, तुरंत भोजन परोसा जाता है। जैसे ही वे लोग भोजन खाकर उठते हैं| उसके बाद तुरंत बैटरी चालित मशीन से लंगर हाल की सफाई कर दी जाती है जिससे दूसरे लोग भी आकार स्थान ग्रहण करें|

गुरु रामदास लंगर के इतने बड़े रसोई को लेकर एक बहुत बड़ी खुशखबरी आई है। केंद्रीय सरकार ने इस रसोई को बिल्कुल टैक्स फ्री कर दिया है। अब इसमें बनने वाले लंगर पर जीएसटी नहीं लगेगा| केंद्रीय मंत्री हरसिमरत बादल ने ट्वीट करके यह जानकारी लोगों को दी। हम आपको बता दें कि लंगर पर जीएसटी लगाए जाने का विरोध करते हुए एसजीपीसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्तमंत्री और पंजाब सीएम को पत्र लिखा था।

इस विशाल रसोई में ऑटोमेटिक रोटी मेकर मशीन से एक घंटे में 25 हजार रोटियाँ बनाई जाती हैं। इसके अलावा रोजाना 70 क्विंटल आटा, 20 क्विंटल दाल, सब्जियां, 12 क्विंटल चावल लगता है। 500 किलो देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है। ईधन में सौ गैस सिलेंडर, 500 किलो लकड़ी की खपत होता है। मैनेजर का कहना हैं कि इतनी बड़ी रसोई को चलाने के लिए पैसा दुनिया में बसे लाखों सिख परिवार भेजते हैं। ये लोग अपनी कमाई का दसवां भाग गुरुद्वारों की सेवा में अर्पित करते हैं। इन्हीं पैसों से ही गुरुद्वारे का प्रबंध और लंगर का खर्च चलता है।

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