अगर आपकी उंगलियों का भी हो जाता है ऐसा हाल तो एक बार जरूर पढ़ लें ये खबर

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हमारे शरीर की रचना अन्य प्राणियों से सबसे अलग है, जिसमे सबसे अहम भाग दिमाग का है। हमारे शरीर की संरचना काफी जटिल है। जिसे समझना काफी मुश्किल है। हमारे शरीर में ऐसी बहुत सी प्रक्रियाए होती है जिसकी जानकारी हमे होती ही नही है। आज हम आपके लिए एक ऐसी ही जानकारी ले कर आये है जो हमे मालुम नहीं है कि हमारे शरीर में ऐसा क्यों होता है? आपने अक्सर यह देखा होगा कि जब हम अपने हाथों को या पैरों को ज्यादा देर तक पानी में रखते है तो हमारे हाथो व पैरों की उंगलियां पानी के भीगने के कारण सिलवटें आ जाती हैं। आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या आपने कभी सोचा है? आज हम आपको इसी के बारे में बताने जा रहे है, तो चलिए जानते है-

अगर वैज्ञानिको की माने तो हमारे शरीर के अंदर एक तंत्रिका होती है, जो उंगलियों को पानी के कुछ देर तक संपर्क में आने के बाद अंदर की नसों को सिकोड़ लिया करती है और इस वजह से हमारी त्वचा पर सिलवटें पड़ जाती है. सिलवटें पानी से निकलने के कुछ समय तक ही रहती है। फिर पानी से दूर होने के बाद आपने आप ही धीरे-धीरे पुनः की तरह हो जाती है। यह तंत्रिका हमारे लिए काफी मायने रखती है क्योंकि यह तंत्रिकाए हमारी सांस, दिल के स्पन्दन और साथ ही पसीने को भी नियंत्रित्त करती है। यह क्रियाएँ हमारे जीवन के लिए बहुत आवश्यक भी है।  सिलवटें पड़ने से कई फ़ायदे भी होते हैं।

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एक तरीको से देखा जाए तो हाथ और पैरो की उँगलियों में सिलवटें आना काफी अच्छा माना गया  हैं। एक रिसर्च में स्टडी के दौरान कई व्यक्तियों को सूखी और गीली चीज़े पकड़ने को कहा गया। जिसमें विभिन्न प्रकार के मार्बल्स थीं। व्यक्तियों को यह चीज़ें पहले सूखे हाथों से और बाद में उंगलियों को आधे घंटे पानी में रखने के बाद उठानी थी। रिसर्च में यह देखा गया कि व्यक्तियों को सूखे हाथ के बजाय हाथ पानी में भिगोने के बाद चीजे उठाने में आसानी हुई।

इस स्टडी के को-ऑथर और बायोलॉजिस्ट टॉम स्मलडर ने इस प्रयोग से यह बताया कि हमारे पूर्वजों को सिलवटे वाली उंगली से गीली और नम जगहों से चीज़ें लेने में आसानी होती होगी। इस स्टडी के अनुसार यह सिलवटें किसी भी चीज़ को पकड़ने की क्षमता को बढाती है।

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