Thursday, December 14

क्‍या आपने कभी सोचा है, होटलों में बचे हुए साबुनों को कैसे किया जाता है Re-use

वैसे हर कोई कहीं घुमने या फिर किसी काम से अपने शहर से बाहर जाता है तो होटल में रूकता है और आजकल तो बड़े बड़े शहरों में एक से एक होटल है जो आपको कई सारी सुविधाएं देते हैं जिससे आपको घर जैसा आनंद मिले और आपकी यात्रा में किसी तरह की परेशानी न आए लेकिन इन सब के बदले ये होटल वाले आपसे मोटी रकम वसूल करते हैं। कुछ लोग होटल में मिलने वाला साबुन का अगर उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया तो वो उस क्यूट से नए साबुन को अपने साथ रख लेते हैं। अक्‍सर ऐसा सभी करते होंगें लेकिन इसे स्वीकार कोई नहीं करता है। लेकिन क्‍या आपने कभी सोचा है कि इन होटल वालों ने जो सामान आपको युज करने को दिया और आपने उसका इस्‍तेमाल नहीं किया हो और वहीं छोड़कर आ गए हो तो उसका होटल वाले क्‍या करते होंगे? शायद नहीं सोचा होगा तो आइए आज हम आपको बताते हैं।

आपको जानकर हैरानी होगी कि आपके इस्तेमाल के बाद इन बचे हुए साबुनों के साथ होटल में क्या किया जाता है। इस ट्रेंड की शुरुआत यूएस से हुई थी और इसे दुनिया के सभी होटलों को भी अपनाना चाहिए क्योंकि यह काफी उपयोगी ट्रिक है। सिर्फ यूएस में ही होटल्स में 4.6 मिलियन कमरे हैं और जाहिर सी बात है कि यहां रुकने वाले सभी मेहमान तो पूरे साबुन का इस्तेमाल नहीं कर पाते होंगें। सिर्फ साबुन ही नहीं बल्कि अलग-अलग शैंपू और कंडीश्नर के कंटेनर्स भी आधे बच ही जाते हैं।

इन्‍हें बर्बाद होने से बचाने के लिए ‘क्लीन द वर्ल्ड’ नामक संस्था ‘ग्लोबल सोप प्रोजक्ट’ के साथ मिलकर साझेदारी में एक ऐसी मुहिम चला रही है जिसके तहत आधे प्रयोग किए गए साबुन को नया साबुन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन साबुनों को विकासशील देशों के लिए बनाया जाता है और इससे चीज़ें बर्बाद भी नहीं होती हैं।

इस मुहिम की उन क्षेत्रों में बहुत जरूरत है जहां स्वच्छ पानी, सफाई और सैनिटेशन की सुविधाओं का अभाव है। इन कारणों से बड़ी संख्या में लोग निमोनिया और डायरिया के शिकार हो जाते हैं। साबुन के प्रयोग से इन लोगों में स्वच्छता को बढ़ावा दिया जा सकता है। इन आधे इस्ते‍माल किए गए साबुनों और अन्य चीज़ों को रिसाईकल करने में एक कमरे का महीने का खर्च 75 सेंट्स आता है।

बचे हुए साबुन, बॉडी वॉश, शैंपू, कंडीश्नर को साफ कर उन्हें कीटाणुरहित बनाया जाता है और फिर उन्हें शुद्धता के लिए जांचा जाता है। इसके बाद ही इन चीज़ों को दूसरे लोगों के प्रयोग के लिए भेजा जाता है। कुछ होटल अपने इस्तेमाल की गई टॉयलेटरीज़ को वहां रहने वाले गरीबों, बेसहारा महिलाओं और कम्युनिटी सपोर्ट नेटवर्क को दान कर देते हैं जबकि कुछ होटल्स लोकल सैल्वेशन आर्मी और कुछ लोकल क्लीनिक और अनाथों में इन्हें दान कर देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: