धनतेरस के दिन इसलिए जलाया जाता है यम का दीया

धनतेरस पूजा के दिन से ही दीपावली का त्योहार शुरू हो जाता है। इस दिन बाकी दिनों की अपेक्षा खास तरीको से दीप जलाने की मान्यता है। धनतेरस पूजा के दिन शाम के समय मुख्य द्वार पर 13 दीप जलाने चाहिए और घर के अंदर 13 दीप जलाने चाहिए। धनतेरस के दिन कुबेर भगवान और देवताओ के चिकित्सक धन्वंतरि महाराज की पूजा की जाती है। इस त्योहार की सबसे खास बात यह है की इस दिन पूजा करने से यमराज के द्वारा दी जाने वाली कष्टों से छुटकारा मिल जाता है।

इस दिन शाम के समय में दीप जलाने से और दीप दान करने से यमराज खुश हो जाते है और व्यक्ति अकाल मृत्यु को कभी नहीं प्राप्त करता। लेकिन कुछ खास तरीको से इस दिन दीप जलाया जाता है तो आइए आज हम आपको बताते है की दीप जलाना जरूरी क्यों है और दीप को कैसे जलाया जाता है।

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यम का दिया कैसे जलाय

जैसे की हमने पहले भी उपर की लाइन में बताया है की शाम के समय मुख्य द्वार पर 13 दीप और घर के अंदर 13 दीप जलाया जाता है। लेकिन इस दिए को तब जलाया जाता है जब घर के सभी सदस्य खाना खा ले और सबलोग सोने के लिए चले जाएं। इस दीप को जलाने के लिए नए दीप की कोई आवश्यकता नहीं है।आपको पुराने दीप में ही सरसो का तेल डालकर और रुई की बत्ती बनाकर इसे जलाना है। फिर उसके बाद घर के बाहर नाली,या कूड़े के ढेर यानि की किसी भी गन्दी जगह पर दक्षिण की तरह दीप का मुख कर रख दे। और उसके साथ ही वहाँ जल भी चढ़ाएं। फिर चुपचाप बिना दिप की तरफ मुड़े अपने घर आ जाएं।

धनतेरस की पूजा ऐसे करे

धनतेरस के दिन कोई भी बर्तन खरीदे जो किसी धातु का अवश्य हो। बर्तन खरीदने के बाद उसमे मिठाई भर कर ही अपने घर में जाए। तत्पश्चात् माँ लक्ष्मी, गणेश, कुबेर और धनवंतरी को भोग लगाए। ऐसा करने से घर के सदस्यों को रोग, विपदाएं, और दरिद्रता कभी नहीं आएगी।

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