अब क्या होगा राहुल गांधी का, इस्तीफे पर सस्पेंस अभी भी बरकरार

देश की दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस पार्टी को 2019 के लोकसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा है। नरेंद्र मोदी की लहर के आगे इस बार भी कांग्रेस पार्टी टिक नहीं पायी। वहीं देश भर की 542 सीटों में से बीजेपी और उसके सहयोगी दल 353 सीटों के साथ सत्ता में वापसी कर चुके हैं। इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने 2014 की 41 सीटों की तुलना में 53 सीटें पाकर बेहतर प्रदर्शन किया है लेकिन स्तिथि में ज़्यदा बदलाव नहीं हुआ है।

पार्टी को लोकसभा चुनाव जीताने के लिए कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया था। इसके लिए वह पहली बार दो लोकसभा सीटों से चुनावों में खड़े हुए। वह उत्तर प्रदेश के अमेठी के अलावा केरल के वायनाड से भी प्रत्याशी के रूप में खड़े थे। उन्हें स्मृति ईरानी के हाथों अपनी अमेठी की सीट गवांनी पड़ी और दूसरी तरफ केरल में उन्हें जीत हांसिल हुयी। कांग्रेस पार्टी की उत्तर प्रदेश में कमान सँभालने के लिए प्रियंका गाँधी भी मैदान में उतरीं थी लेकिन वह भी कांग्रेस को इस हार से नहीं बचा सकीं।

23 मई को आये नतीजों के पर राहुल गाँधी ने हार की ज़िम्मेदारी लेकर अपनी हार स्वीकार करी है। इसी हार की समीक्षा करने के लिए आज कांग्रेस पार्टी ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बुलाई है जहाँ सभी पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हुयी हार का ज़िम्मा लेते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर ने भी पार्टी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 62 सीटें बीजेपी को,17 सीटें सैपा-बसपा गठबंधन को और 1 सीट कांग्रेस पार्टी को नसीब हुई है। इसी बीच ख़बर आ रही है कि कांग्रेस पार्टी की समीक्षा मीटिंग में राहुल गांधी अपना अध्यक्ष का इस्तीफ़ा पार्टी को प्रस्तुत कर सकते हैं। हालाँकि इस खबर की अब तक कोई पुष्टि नहीं की जा सकी है।

क्या होगी सीडब्लूसी की बैठक की सबसे महत्वपूर्ण चर्चा ?

सम्भावना यह है कि राहुल गाँधी सीडब्लूसी की बैठक में अपना इस्तीफा प्रस्तुत करेंगे लेकिन पार्टी उनका इस्तीफा अस्वीकार कर देगी। कांग्रेस वर्किंग कमेटी इस हार की सामूहिक ज़िम्मेदारी बताकर इस्तीफा अस्वीकार कर सकती है। और यदि ऐसा होता है तो राहुल गाँधी कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहकर पार्टी की कमान आगे भी संभालेंगे। आपको बता दें कि राहुल गाँधी ने 2017 में सोनिया गाँधी की जगह पार्टी के अध्यक्ष का पद भार संभाला था। अपनी अध्यक्षता में राहुल अब तक तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत कर कांग्रेस की सरकार बना चुके हैं। राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला लोकसभा चुनाव था जिसमे उन्हें हार मिली।

इस मीटिंग में एक पहलू यह भी हो सकता है कि राहुल गांधी अपना इस्तीफा पेश करें और पार्टी उसे स्वीकार कर ले और अगर ऐसा होता है तो कैप्टन अमरिंदर सिंह, अशोक गहलोत और मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम अध्यक्ष की कुर्सी के लिए सबसे ऊपर हैं। ऐसे में इन तीनों नेताओं में किसी एक को पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि ऐसा होने की बहुत कम संभावना है। सबसे ज़्यादा सम्भावना है कि राहुल गाँधी इस बैठक में हार की समीक्षा कर कमज़ोर पहलुओं को समझेंगे और अपना इस्तीफा पेश नहीं करेंगे। आज पता चल जायेगा कि बैठक का नतीजा होगा।

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