Monday, December 18

भूलकर भी ना रखें बच्चों के ये नाम, जीवनभर झेलनी पड़ेगी परेशानियां

इस धरती पर जो भी जन्‍म लेता है तो उसे संबोधित करने के लिए एक नाम दिया जाता है, जिससे वह दुनिया में जाना जाता है। नाम किसी भी बच्‍चे के जन्‍म लेते ही उसके परिवार के लोगो द्वारा सुनिश्चित कर लिया जाता हैं। किसी भी शिशु का नाम उसके परिवार वाले यह सोच कर रखते है कि वो अपने नाम के ही तरह कीर्तिमान, आयुष्मान और शौर्यवान बने। नाम हर मनुष्य की पहचान बताती है। जब भी किसी शिशु का नाम रखा जाता है, तो उसके साथ उसके परिवार की जुडी होती है उमीदें जो आगे चलकर अपना और अपने परिवार का नाम रौशन कर सके। साथ ही अपने नाम का एक अलग पहचान बना सके।

लेकिन क्या आप यह जानते है कि किसी भी शिशु का नाम उसके जीवन पर बहुत बड़ा असर डालता है। किसी भी शिशु का नामकरण करने के लिए बहुत सी बातों का ध्यान में रखना चाहिए। ऐसे बहुत से लोग है जिनका नाम हमारे पुराणों व शास्‍त्रों में मिल जाता है। ऐसे कई चरित्र हैं जो प्रसिद्ध व साहसी हैं लेकिन इसके बावजूद आप भूलकर भी अपने बच्चों का नाम ऐसा न रखे। तो आइये आपको बताते हैं कुछ ऐसे ही नाम और उन नामों के बारे में।

विभीषण

रामायण जो हम सभी लोगो के लिए बहुत ही पवित्र है। रामायण तो हम सभी ने देखा है उसमे एक प्रमुख पात्र होता है विभीषण का इस नाम का अर्थ है जिसे कभी भी गुस्सा न आता हो लेकिन इस नाम का इतना अच्‍छा अर्थ होने के बावजूद लोग फिर भी अपने बच्‍चों का यह नाम नहीं रखते। क्योकि रामायण में विभीषण ने अपने भाई रावण के मौत का रहस्य भगवान श्रीराम को बताया जिसके कारण रावण की मृत्यु हो गई। एक कारण यह भी है कि भगवान श्रीराम को रावण का रहस्य बताने के कारण उनको लोग घर का भेदी लंका ढाए कहते है।

द्रौपदी

महाभारत में मुख्य भूमिका द्रौपदी की है जिनके कारण महाभारत हुआ था। इस महाकाव्य में  द्रौपदी पांचाल देश के राजा द्रुपद की पुत्री थी जो बाद में पांचों पाण्डवों की अर्धांगनी बनी। किसी भी शिशु का नाम द्रौपदी नही रखा जाता क्योंकि द्रोपदी पंच-कन्याओं में से एक हैं। जिन्हें चिर-कुमारी कहा जाता है। यही कारण है कि द्रौपदी का नाम रखने से कतराते हैं।

यह भी पढ़ें : बड़े काम के हैं ये आठ मंत्र, प्रतिदिन इनका जाप करने से हर इच्‍छा होगी पूरी

मंदोदरी

रामायण की एक और प्रमुख पात्र है मंदोदरी का। मंदोदरी पंच-कन्याओं में से एक हैं जिन्हें चिर-कुमारी कहा गया है। मंदोदरी मयदानव की पुत्री थी जिनका विवाह लंकापति रावण से हुआ। देखा जाए तो मंदोदरी वैसे बहुत दयालु और अच्छे गुणों वाली स्त्री थी लेकिन इन सब के बावजूद कोई भी परिवार अपने बेटी का नाम मंदोदरी नहीं रखते है। मंदोदरी का रावण की पत्नी होने के कारण कोई भी माता-पिता अपनी बेटी का नाम यह नहीं रखता है।

सुग्रीव

रामायण में बालि के भाई सुग्रीव थे जो हनुमान के कारण श्रीराम से उनकी मित्रता हुई। वाल्मीकि रामायण में किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड तथा युद्धकाण्ड में सुग्रीव का वर्णन वानरराज के रूप में है। सुग्रीव ने राज्य प्राप्त करने के लिए अपने बड़े भाई बालि से युद्ध करने के दौरान भगवान श्रीराम की सहयता से उनकी मृत्यु करवा दी। यही कारण है जिससे लोग अपने बच्‍चों का नाम सुग्रीव नहीं रखते है।

अश्वत्धामा

महाभारत के महत्‍वपूर्ण पात्र अश्वत्धामा जो द्रोणाचार्य के पुत्र थे और बेहद साहसी और बहादुर योद्धा थे। लेकिन उन्होने ऐसे बुरे कर्म किये है जिसकी वजह से भगवान कृष्ण ने उन्हें सदियों तक पीड़ा झेलने का श्राप दिया है यही कारण है जिसकी वजह से कोई भी माता-पिता अपने बच्चे का नाम अश्वत्धामा नहीं रखता है।

गांधारी

महाभारत में गांधारी का एक अहम पात्र हैं जो महाराज धृतराष्ट्र की पत्नी थी साथ ही प्रमुख खलनायक दुर्योधन की माँ थीं। गांधारी बहुत महान और गुणी थी लेकिन कुरु वंश में विवाह होने के कारण उन्हें बहुत से दुखों का सामना करना पड़ा। गांधारी के जीवित रहते ही उनके सभी पुत्रों की मौत हो गई यही कारण है कि कोई भी परिवार अपनी बेटी का नाम गांधारी नहीं रखते।

यह भी पढ़ें : भूल से भी नहीं करना चाहिए इस तरह से गायत्री मंत्र का जाप, घर में आती है दरिद्रता

दुर्योधन

महाभारत के प्रमुख पात्र दुर्योधन जो एक महान और वीर योद्धा थे लेकिन लालच की वजह से उन्होने अपने पूरे वंश का सर्वनाश कर डाला। यही कारण है की लोग अपने बेटे का नाम दुर्योधन नहीं रखते हैं। उन्होंने मतभेद न किया होता तो महाभारत की नौबत नहीं आती लेकिन लालच ने उन्हें और उनके परिवार को ले डूबा।

कैकेयी

रामायण में राम को वन भेजने में सबसे प्रमुख पात्र होता है तो वो है कैकेयी का। जो एक राज परिवार से सम्भन्ध रखती थी। कैकेयी राजा दरशथ की सबसे प्रिय रानी थी लेकिन एक नौकरानी के चक्कर में उन्होने अपने परिवार में भेद-भाव किया और दशरथ के मृत्यु का कारण बनीं। यही कारण है जिससे लोग अपनी बच्ची का नाम कैकेयी नहीं रखते हैं।  साथ ही उन्ही के कारण श्रीराम, लक्ष्मण और सीता को 14 सालो तक वनवास में रहना पड़ा था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *