9/11 का वो काला दिन जब राख हो गया था WTC, 90 देशों के लोगों की गई थी जान

11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमले को आज 16 बरस गुजर चुके हैं, लेकिन उस मनहूस दिन से जुड़े आंकड़े आज भी वो भयानक लम्हा भूलने नहीं देते। न्यूयॉर्क जिस वर्ल्ड ट्रेड सेंटर कोन अपनी शान समझते थे उसे आतंकियों ने दो विमानों का मिसाइल का तरह उपयोग कर पलभर में राख कर दिया।

11 सितम्बर 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका पर अल-क़ायदा द्वारा समन्वित आत्मघाती हमलों की श्रृंखला थी। उस दिन सवेरे, 19 अल कायदा आतंकवादियों ने चार वाणिज्यिक यात्री जेट एअरलाइनर्स का अपहरण कर लिया था। वहीं अपहरणकर्ताओं ने तीसरे विमान को बस वाशिंगटन डी.सी. के बाहर, आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन में टकरा दिया। वर्ल्ड ट्रेड सेन्टर पर हुए हमले में मारे गए 2,977 पीड़ितों में से न्यूयॉर्क शहर तथा पोर्ट अथॉरिटी के 343 अग्निशामक और 60 पुलिस अधिकारी थे। पेंटागन पर हुए हमले में 184 लोग मारे गए थे। करीब 90 देशों के नागरिकों ने इस हमले में अपनी जान गंवाई थी।

दुनिया पर धाक जमाने वाला अमेरिका इस हमले से पूरी तरह थर्रा चुका था। चार यात्री विमान ने तब भारी तबाही मचाई थी। पूर्व
राष्ट्रपति जार्ज बुश ने ओसामा और उसके साथियों का खात्मा करने के लिए अरबों डॉलर खर्च डाले लेकिन खाली हाथ ही रहे अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इस घटना को अमेरिकी इतिहास का सबसे काला दिन करार दिया था।

नए राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उस मिशन को अंजाम दिया और पाकिस्तान के एबटाबाद में एक गुप्त कार्रवाई करके ओसामा को मौत के घाट उतार दिया। इस हमले के पीछे ओसामा बिन लादेन का हाथ माना जाता है, जिसे सालों तक खोजने के बाद अमेरिका ने मई 2011 में पाकिस्तान के ऐबटाबाद में मार गिराया था।

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