Thursday, December 14

इस वजह से होता है किन्नरों का जन्म, जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

प्रकृत‌ि में नर नारी के अलावा एक अन्य वर्ग भी है जो न तो पूरी तरह नर होता है और न नारी। जिसे लोग हिजड़ा या किन्नर या फिर ट्रांसजेंडर के नाम से संबोधित करते हैं। जी हां हिजड़ा जिसके बारे में जानने की उत्सुकता हमेशा से लोगों के जेहन में रहती है।

आपको शायद पता नहा हो कि किन्नरों का जननांग जन्म से लेकर मृत्यु परांत एक जैसा ही रहता है। यूं कहें कि इनके जननांग कभी विकसित नहीं होते। किन्नरों के अंदर एक अलग गुण पाए जाते हैं। इनमे पुरुष और स्त्री दोनों के गुण एक साथ पाए जाते हैं। आज हम आपको बताएँगे किन्नरों के जन्म से जुड़े कई सवाल उठते है हमारे दिमाग में, क्या मकसद होता है इनके जन्म का।

आपने गौर किया होगा की जब भी हमारे घर के आस पास कोई ख़ुशी का माहौल होता है तो अक्सर किन्नर जुट जाते है। ऐसा खासतौर पर तब ज्यादा होता है जब किसी के घर में बच्चा पैदा होता है। इस तरह के जश्न में वे ढेर सारे दुवाओं और शुभकामनाओं के साथ सम्मिलित होते है। कई लोगो का यह भी कहना है की किन्नरों का ऐसे मौकों पर घर पर आना काफी शुभ माना जाता है।

आमतौर पर हर त्योहार और जश्न के मौकों पर जिस तरह हर धर्म समुदाय के लोग आपस में मिलते है उस तरह किन्नर हर मौके पर नही आते। किन्नर सिर्फ खास मौकों पर ही आते है। किन्नर समाज के रहन सहन जीने का तौर तरीके सब कुछ एकदम अलग है, किन्नर जिन्हें हिजड़ा के नाम से भी पुकारा जाता है, उसके पीछे भी एक रहस्य है। इस समाज से जुड़े जानकार का मानना है कि किन्नरों का जन्म आज भी समाज के बीच एक रहस्य बना हुआ है, उनके जन्म से जुडी होती है इनकी पहचान, लैंगिक रूप से नर और नारी के बीच होते है किन्नर। देखा जाये तो शारीरिक रूप से नर होते है किन्नर लेकिन कुछ स्त्री भी होती है। अक्सर किन्नर खुद को स्त्री की तरह ही दिखाना चाहते है और भाषा भी स्त्री वाली ही इस्तेमाल करते है।

 

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