अंतिम क्रिया के बाद शव के सिर पर क्यों मारा जाता है डंडा , इसके पीछे छिपा है चौका देने वाला रहस्य

आज के युग को वैज्ञानिक युग कहा जाता है फिर भी हिन्दू धर्म में हमारे पूर्वजो ने कई ऐसे संस्कार, रीतिरिवाजों का पालन किया है जिनकी जानकारी के बिना हम अज्ञान ही रहेगे। हिन्दू धर्म विश्व का सबसे प्रचीन धर्म है। आधुनिक समाज में हम हिन्दू धर्म की परंपराओ और संस्कृति को खोते चले जा रहे है। हिन्दू धर्म में ऐसी ही एक संस्कार का पालन किया जाता है कि किसी भी इंसान के अंतिम संस्कार में महिलाओ को शमशान घाट में जाने से रोकना लेकिन ऐसा क्यूँ है ये हमने कभी जानने की कोशिश नहीं की है।

हम सभी जानते हैं कि महिलाओं का दिल पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा कोमल होता है। इसलिए कहा जाता है कि अगर कोई श्मशान घाट पर रोता है तो मरनेवाले की आत्मा को शांति नहीं मिलती है।

महिलाओं का दिल बेहद कोमल होता है लिहाजा अंतिम संस्कार की क्रिया को देखकर महिलाएं डर जाती हैं। श्मशान घाट में चिता को जलते देख महिलाएं डर ना जाएं इसके लिए उन्हें घर पर ही रहने के लिए कहा जाता है।

कहा जाता है कि श्मशान घाट में हरदम आत्माओं का वास होता है। ऐसे में आत्माओं से महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा होता है क्योंकि बुरी आत्माएं अक्सर महिलाओं को ही अपना निशाना बनाती हैं।

हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले सदस्यों को अपने बाल मुंडवाने होते हैं। इसलिए महिलाओं को दाह संस्कार में शामिल होने के लिए श्मशान घाट नहीं जाने दिया जाता है।

श्मशान घाट से लौटने के बाद पुरुषों के पैर धुलवाने और स्नान करवाने के लिए महिलाओं का घर पर रहना बेहद जरूरी होता है इसलिए उन्हें अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट जाने से मना किया जाता है।

जब कोई मर जाता है तो उसका बेटा उसके सर में डंडा मारता है अगर ऐसा नहीं किया जाए तो कहा जाता है कि जो तंत्र विद्या वाले लोग होते हैं वो व्‍यक्ति के मरने के बाद उसके सिर के फिराक में रहते हैं ताकि इससे वो उसका दूरूपयोग कर सके साथ में यह भी कहा जाता है कि इस सिर के द्वारा तांत्रिक उस व्‍यक्ति को अपने कब्‍जे में कर सकता है और उसके आत्‍मा के द्वारा गलत काम करवा सकता है।

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