Friday, December 15

इस वजह से असफल रहा भगवान राम और माता सीता का दांपत्य जीवन, ज्योतिषों ने उठाया रहस्य से पर्दा

भगवन श्री राम के जीवन से हम सभी भली-भाति अवगत है। भगवान श्री राम को भगवान होते हुए भी इंसानी रूप में कितने कष्ट झेलने को मिले है, इससे हम सभी वाकिफ है। जहाँ भगवान श्री राम को वन में इतनी पीड़ा सहनी पड़ी है, वहीँ उनका दाम्पत्य जीवन भी सफल नहीं रहा है। आखिर क्यों भगवान श्री राम और माता सीता का दाम्पत्य जीवन इतना असफल रहा? आपको बता दे ज्योतिषों ने इस रहस्य से पर्दा हटा दिया है। आइये आपको बताते है आखिर क्यों श्री राम जी को देव स्वरुप होने के बावजूद भी उनका दाम्पत्य जीवन असफल रहा-

ज्योतिषों की माने तो शुक्रास्त होने के बाद विवाह अशुभ माना जाता है। जबकि भगवान श्री राम और माता सीता का विवाह शुक्रास्त में हुआ था। ज्योतिष वहां भी सही साबित हुआ था। भगवान श्री राम का पूरा दाम्पत्य जीवन कठिनाइयों से भरा रहा और साथ ही माता सीता का साथ भी भगवान श्री राम को नही मिल पाया।

यह भी पढ़े :-अपने पति को निर्वस्त्र देखते ही क्यों छोड़कर चली गयी उर्वशी?

ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी जो भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष भी है। उन्होंने अपने टीम के साथ मिलकर उन विवाहों पर रिसर्च किया जो शुक्र अस्त होने पर हुए हैं। डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने यह बताया कि श्री राम का विवाह त्रेता युग में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी को हुआ था। तब शुक्र अस्त थे। जिसके कारण भगवान श्री राम का पूरा वैवाहिक जीवन असफल रहा और श्री राम के साथ उनके अन्य तीन भाइयों का भी विवाह  हुआ था। उस समय भी शुक्र अस्त होने के कारण इनके तीन भाइयों का भी  वैवाहिक जीवन भी कष्टमय रहा।

यह भी पढ़े :-भूलकर भी ना रखें बच्चों के ये नाम, जीवनभर झेलनी पड़ेगी परेशानियां

लक्ष्मण जहाँ राम के साथ वन चले गए और उनकी पत्नी वियोग सहती रही। वहीँ राम के वन जाने के बाद भरत ने साधु वेश धारण कर लिया और 14 वर्ष कुटिया में ही कटे। और शत्रुघ्न की पत्नी भरत की पत्नी के सेवा में ही लगी रही। श्री राम जब वन से आये फिर माता सीता वनवास चली गई और जब आगे चलकर दोनों मिले तो श्री राम और माता सीता दोनों ने ही पप्राणों का त्याग कर दिया। इसी तरह तीनों भाइयों की पत्नियां अपनी बहन सीता के वियोग में विरक्तिनी हो गई।

इसीलिए कहा गया जी की शुक्रास्त में विवाह होना सबको काफी भारी पड़ सकता है। अगर जन्मकुंडली में शुक्र उचित स्थान पर न हो तो कष्ट बहुत आते हैं। ज्योतिष के अनुसार शुक्रास्त के समय विवाह नहीं करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: