Sunday, November 19News That Matters

Author: Youth

रविवार के दिन करते हैं ये उपाय तो उन्नति के साथ ही मिलेगा राजपाठ

रविवार के दिन करते हैं ये उपाय तो उन्नति के साथ ही मिलेगा राजपाठ

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रविवार सूर्य देव की पूजा का विशेष दिन है। अगर आपके जीवन में कोई भी परेशानी है तो सूर्य देव को प्रसन्न कर अपनी सारी परेशानियों से निजात पा सकते है । सूर्य की कृपा से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। साथ ही, नौकरी और भाग्य संबंधी परेशानियां भी सूर्य पूजा से दूर हो सकती हैं। शास्त्रों में सूर्य पूजा के लिए कई मंत्र बताए गए हैं, इन मंत्रों का जप सुबह-सुबह करना चाहिए। रविवार से शुरू करके हर रोज सूर्य मंत्रों का जप करें और सूर्य को जल अर्पित करें। ये उपाय सभी सुख प्रदान करने वाला माना गया है और सूर्य नमस्कार करने से बल, बुद्धि, विद्या, वैभव, तेज, ओज, पराक्रम व दिव्यता आती है। यह भी पढ़े: जन्म के महीने से जानें महिलाओं का स्वभाव किसी व्यक्ति की कुंडली में गरीबी और शत्रुओं से हारना लिखा हो तो उसे सूर्य की पूजा से लाभ प्राप्त होगा। इस दिन सूर्यदेव की विशेष पूजा करने से व्यक्
शुक्रवार को अगर करते हैं ये उपाय तो मां लक्ष्मी करेंगी धन की बरसात

शुक्रवार को अगर करते हैं ये उपाय तो मां लक्ष्मी करेंगी धन की बरसात

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तंत्र शास्त्र के अनुसार यदि शुक्रवार के दिन माँ महालक्ष्मी की आराधना की जाए तो वो बहुत जल्दी ही प्रसन्न हो जाती है, हालांकि माँ महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए ग्रंथो में कुछ खास उपाय बताए गए है। तो चलिए अब आपको बताते है, कि वो कौन से उपाय है जिनसे माँ महालक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न हो जाएंगी और आपको आजीवन धनी बनने का आशीर्वाद देंगी। इसमें सबसे पहले उपाय के अनुसार शुक्रवार की शाम को गाय के घी का दीपक घर के ईशान कोण में जलाए. इस दीपक में थोड़ा सा केसर भी डाले और रुई के स्थान पर लाल रंग के सूती धागे का इस्तेमाल करे। बता दे कि इस उपाय से जल्द ही धन सम्पदा आने के योग बनते है. इसके इलावा दूसरे उपाय के अनुसार शुक्रवार को सात कुंवारी लड़कियों को घर बुला कर उन्हें भोजन करवाएं और भोजन में केसर युक्त खीर तो जरूर खिलाएं. इसके साथ ही उन लड़कियों को दक्षिणा और वस्त्र भी दे, इस उपाय से भी आपको जल्दी ही धन क
मंगलदोष से पाना है छुटकारा तो मंगलवार के दिन कर लें इनमें से कोई भी एक काम

मंगलदोष से पाना है छुटकारा तो मंगलवार के दिन कर लें इनमें से कोई भी एक काम

Religion
अक्सर देखा गया है कि जब बच्चों को नजर लग जाती है तो उनकी नजर विशेष रूप से मंगलवार या शनिवार के दिन उतारी जाती है। ऐसा क्यों? इसका सीधा अर्थ यही है कि प्रत्येक वार का अपना अलग महत्व है। सप्ताह के इन वारों का सीधा संबंध विभिन्न ग्रहों से है, इसलिए जिस ग्रह को शांत करना हो, उससे संबंधित उपाय विशेष वार को किए जाते हैं। शास्‍त्रों में भी माना गया है कि अगर आपकी कुंडली में कोई ऐसा ग्रह है, जो आपको कष्ट पहुंचा रहा है, तो आपको उस ग्रह से संबंधित देवी-देवता की आराधना करके उन ग्रहों को और अधिक शक्ति प्रदान नहीं करनी चाहिए। यह भी पढ़ें: शाम के समय भूल से भी ना करें ये 5 काम आती है दरिद्रता क्योंकि कष्टदाई ग्रह की शक्ति बढ़ने से आपके कष्ट में इजाफा ही होगा। हां, उस ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करने से उस ग्रह की दुष्टता कम होगी और आप का कष्ट कम होगा। मंगल उग्र ग्रह है और इनका वर्ण लाल माना
आज है शंख पूजन, दूध भरे शंख से करें श्रीहरी का अभिषेक, दरिद्रता से मिलेगी मुक्ति

आज है शंख पूजन, दूध भरे शंख से करें श्रीहरी का अभिषेक, दरिद्रता से मिलेगी मुक्ति

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शास्त्रानुसार श्रीकृष्ण का स्वरूप कहे जाने वाले मार्गशीर्ष माह में शंख पूजन का विशेष महत्व रहेगा जो कि आज होना है। विष्णु पुराण अनुसार समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्नों में से शंख एक रत्न है। लक्ष्मी समुद्र पुत्री हैं व शंख उनका सहोदर भाई है। अष्टसिद्धि व नवनिधी में शंख का स्थान महत्वपूर्ण है। शंख को विजय, समृद्धि, सुख, यश, र्कीत व लक्ष्मी का साक्षात प्रतीक माना गया है। विष्णु पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए 14 रत्नों में से ये एक रत्न है शंख। सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिए इसे अपने घर में स्थापित करना चाहिए। माना जाता है कि अगहन के महीने में शंख पूजन का विशेष महत्व है। अगहन के महीने में किसी भी शंख को भगवान श्रीकृष्ण का पंचजन्य शंख मान कर उसका पूजन-अर्चन करने से मनुष्‍य की समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं। विशेष पूजन विधि शंख का विधिवत दशोपचार पूजन करें। रोली मिले घी से
भूल से भी नहीं करना चाहिए इस तरह से गायत्री मंत्र का जाप, घर में आती है दरिद्रता

भूल से भी नहीं करना चाहिए इस तरह से गायत्री मंत्र का जाप, घर में आती है दरिद्रता

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ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले हमेशा गायत्री मंत्र का ही जाप किया जाता है क्योंकि इसे ब्रह्मांड का महामंत्र माना गया है। बताना चाहेंगे की गायत्री मंत्र की महत्ता से तो तकरीबन हर कोई बेहतर वाकिफ होगा, बचपन में अधिकतर स्कूलों में भी प्रार्थना के समय गायत्री मंत्र का जाप कराया जाता था ताकि हर किसी में इसकी पवित्रता आती रहे। आपको बता दे की गायत्री मंत्र पूरी तरह से एक सिद्ध वैदिक मंत्र है, ऐसा कहा जाता है की इस मंत्र की साधना से किसी भी प्राणी को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि ऐसा माना जाता है की इस मंत्र का जाप जिस किसी भी उदेश्य से किया जाता है वह कार्य अवश्य पूरा हो जाता है। प्राचीन समय से आज तक इस मंत्र की बहुत महत्ता रही है और गायत्री साधना सदा ही मनुष्य को सांसारिक मोह-माया से बचा कर रखता है। यह भी पढ़ें : शास्त्रों के अनुसार
आज मनाया जा रहा है संकष्टी चतुर्थी, गणेश जी की शुभदृष्टि प्राप्त करने का है अच्छा दिन

आज मनाया जा रहा है संकष्टी चतुर्थी, गणेश जी की शुभदृष्टि प्राप्त करने का है अच्छा दिन

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विद्वानो और शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है की पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम जाना जाता है। आपको बताना चाहेंगे की यदि संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है तो यह अंगारकी चतुर्थी होती है जो कई मायनों में बहुत ही शुभ माना जाता है। आज हम आपको इसके बारे मे कुछ विशेष बातें बताने जा रहे है जो श्री गणेश जी कृपा प्राप्त करने हेतु है।   अक्सर यही कहा जाता है की किसी भी देवी-देवता की पूजा करने में आपकी भाषा से ज्यादा आपके मन के भाव का ज्यादा महत्व होता है और इसी वजह से सलाह दी जाती है की हमेशा पवित्र मन से भगवान श्रीगणेश का पूजन करते है तो इससे आपको मानसिक शान्ति तो मिलती ही है साथ ही साथ आपके घर-परिवार-व्यवसाय में सुख-समृद्धि की भी वृद्धि होती है। यह भी पढ़ें : घर में रखा तुलसी का पौधा पड़ जाए सूखा या काला, तो जरूर जाने ये महत्वपूर्ण बा
आज से शुरू हो रहा भगवान कृष्ण का प्रिय महीना, जानिए कैसे करें कान्हा को प्रसन्‍न

आज से शुरू हो रहा भगवान कृष्ण का प्रिय महीना, जानिए कैसे करें कान्हा को प्रसन्‍न

Religion
हिंदू पंचांग के अनुसार, अगहन का महीना शुरू होने वाला है। यह ऐसा महीना है जिसे भगवान कहते हैं कि मैं खुद यही महीना हूं। इस महीने में ईश्वर होने के सर्वाधिक गुण पाए जाते हैं। इसे मार्गशीर्ष या अगहन का महीना कहते हैं। इसे अग्रहायण भी कहते हैं। हिंदू शास्त्रों में इस माह को सबसे पवित्र महीना माना जाता है। पुराणों के अनुसार, विधि-विधान से अगहन मास में शंख की पूजा की जानी चाहिए। जिस प्रकार सभी देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, वैसे ही शंख का भी पूजा करें। इस मास में साधारण शंख की पूजा भी पंचजन्य शंख की पूजा के समान फल देती है। सभी वैदिक कामों में शंख का विशेष स्थान है। शंख का जल सभी को पवित्र करने वाला माना गया है, इसी वजह से आरती के बाद श्रद्धालुओं पर शंख से जल छिड़का जाता है। साथ ही शंख को लक्ष्मी का भी प्रतीक माना जाता है, इसकी पूजा महालक्ष्मी को प्रसन्न करने वाली होती है। यह भी पढ़ें
घर में रखा तुलसी का पौधा पड़ जाए सूखा या काला, तो जरूर जाने ये महत्वपूर्ण बाते

घर में रखा तुलसी का पौधा पड़ जाए सूखा या काला, तो जरूर जाने ये महत्वपूर्ण बाते

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प्राचीन काल से ही यह परंपरा चली आ रही है कि घर में तुलसी का पौधा होना चाहिए। शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय, पवित्र और देवी स्वरूप माना गया है, इस कारण घर में तुलसी हो तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। यदि ये बातें ध्यान रखी जाती हैं तो सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा हमारे घर पर बनी रहती है। घर में सकारात्मक और सुखद वातावरण बना रहता है, पैसों की कमी नहीं आती है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है। बात दे कि इस पौधे से जुड़ी कुछ ऐसी मान्‍यताएं भी हैं जो बहुत ही कम लोग जानते हैं और अगर इन बातों को ध्‍यान न दिया जाए तो अशुभ भी हो सकता है। यदि घर में लगा हुआ तुलसी का पौधा सूख जाता है या काला हो जाता है तो आपके साथ बहुत कुछ हो सकता। आइए जानते हैं कुछ ऐसी बातें जो शायद ही कोई जानता होगा। यह भी पढ़ें : कार्तिक पूर्णिमा: स्नान से लेकर रात तक करे ये काम, लक्ष्मी प्रसन्न होकर
आज शनिवार के दिन बन रहा है ये खास संयोग, बुरा समय टालने के लिए कर सकतेे हैं ये उपाय

आज शनिवार के दिन बन रहा है ये खास संयोग, बुरा समय टालने के लिए कर सकतेे हैं ये उपाय

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इस बार का 4 नवंबर के शनिवार का दिन बहुत ही खास है, इस दिन कई दुर्लभ शुभ संयोग लेकर आई है जैसे स्नान दान आदि की कार्तिक पूर्णिमा, रब्बीनूर पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी महाराज का जन्मोत्सव भी मनाया जा रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि आज ही के दिन कार्तिक स्नान एवं भीष्म पंचक, मेला स्वामी श्री रामतीर्थ जी, तीर्थ राज मेला श्री पुष्कर जी (अजमेर), मेला श्री कपालमोचन जी, मेला बाबा श्री रुद्रानंद नारी एवं मेला जोगी पांगा, मेला गढगंगा हरिहर क्षेत्र सोनपुर, मेला झिड़ी बाबा, त्रिपुर उत्सव, देव दीवाली, श्री निम्बार्क आचार्य जयंती और रथ यात्रा एवं चातुर्मास व्रत नियम आदि। शनिवार के कारक ग्रह शनि हैं। कर्मफलदाता शनि कर्मों के अनुसार फल देते हैं, वह एकमात्र ऐसे देव हैं जो किसी खास पूजन से नहीं बल्कि अच्छे कर्मों से प्रसन्न होकर व्यक्ति के बुरे दौर को भी अच्छे समय में परिवर्तित कर देते हैं। इ
धरती पर दीपावली मनाने आएंगे देवता, इस तरह पूजन कर अपने संकटों का करें अंत

धरती पर दीपावली मनाने आएंगे देवता, इस तरह पूजन कर अपने संकटों का करें अंत

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देव दिवाली कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन यानि दिवाली से ठीक 15 दिन बाद मनाई जाती है। यूं तो सभी त्योहार देश के हर कोने में मनाया जाता है लेकिन कुछ त्योहार हैं जो विशेषकर किसी राज्य से जुड़े होते हैं। इसी तरह देव दिवाली का महत्व विशेषकर भारत की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, जिसके उल्लास में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे "देव दीपावली" के रूप में मान्यता मिली। इसी तिथि को भगवान शंकर ने अपने हाथों से बसाई काशी के अहंकारी राजा दिवोदास के अहंकार को नष्ट कर दिया। यह पर्व ऋतुओं में श्रेष्ठ शरद, मासों में श्रेष्ठ कार्तिक व तिथियों में श्रेष्ठ पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है, इसे देवताओं का भी दिन माना जाता है। इस माह किए हुए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का