सूर्यदेव को जल चढ़ाते समय हमेशा इन बातों का रखें ध्‍यान, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा

हमारे हिन्दू धर्म में सूर्य को देवता माना जाता है और साथ ही प्रातः उठते ही भगवान सूर्यदेव को जल भी अर्पित किया जाता है, जो हमारे देश में कई लोग करते हैं। रोजाना सुबह उठकर स्नान करने के पश्चात सूर्यदेव को अर्घ्य देना बहुत ही शुभ माना गया है। इसके महत्व और विधि का पूरा व्याख्यान हमारे सनातन धर्म में बताया गया है।

शास्त्रों कि माने तो यदि हम प्रतिदिन सूर्यदेव को पुरे विधि द्वारा जल अर्पित करे तो इससे हमें समाज में मान, सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है। सूर्यदेव को अर्घ्य देने से हमारा मन और मस्तिष्क दोनों ही शांत रहता है, जिससे हमारे सारे काम सुग्मता पूर्वक होते है लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो सूर्य देव को जल अर्पण करते समय कुछ आवश्यक बातो पर ध्यान नहीं देते, जिसे जानना काफी महत्व पूर्ण है। तो चलिए आपको आज हम आपको बताते है कि आखिर हमें भगवान सूर्यदेव को जल कैसे अर्पित करना चाहिए और साथ ही किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

दैनिक कार्य करने के बाद आप जब भगवान सूर्यदेव को जल अर्पित करें, तो ॐ सूर्याय नमः सूर्य मंत्र का जाप हमेशा करना चाहिए। जब भी आप सूर्यदेव को जल अर्पित करें तो अपने माथे को जमीन से अवश्य छुआएं और ऊँ खखोल्काय शान्ताय करणत्रयहेतवे। निवेदयामि चात्मानं नमस्ते ज्ञानरूपिणे।। त्वमेव ब्रह्म परममापो ज्योती रसोमृत्तम्। भूर्भुव: स्वस्त्वमोङ्कार: सर्वो रुद्र: सनातन:।। इन मंत्रों का जाप अपने मन में अवश्य करें।

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यदि आप इस प्रकार सूर्यदेव को जल चढ़ाए तो आप निर्भीक, उर्जावान और साथ ही अंदर से वीरता वाले भाव उत्पन्न होंगे। साथ ही सूर्य की पूजा करने से आप विद्वान और बुद्धिमान भी बनेंगे। इससे आपके अन्दर का अहंकार, क्रोध और बुरे विचारो का भी नाश होगा। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखे कि सूर्यदेव को जल किसी तांबे के बर्तन से ही अर्पित करें क्योंकि तांबे को अशुद्धियां दूर करने वाला माना गया है। जिससे जल की अशुद्धियां दूर हो जाती हैं।
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