मिसाल: ये हैं देश की पहली ट्रांसजेंडर जज, स्कूल छोड़ा, घर छोड़ा, भीख भी मांगी, फिर पाया मुकाम

वैसे तो आपने सफलता की बहुत कहानीयां सुनी होगी लेकिन दुनिया का यह एक अनोखी सफलता है जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जायेगे। जोयिता मंडल, जो पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले की रहने वाली है, आपको बता दे की जोयिता मंडल पशिम बंगाल की पहली ट्रांसजेंडर है जिन्हें जज का पद हासिल हुआ है जो इस समुदाय के लिए बहुत ही बड़ी बात है। ट्रांसजेंडर ऐसे लोग होते है जो प्रकृतिक रूप से ना पुरुष की श्रेणी में आते है ना ही महिला की। भारतीय समाज में ऐसे लोगो को हिजड़ा या किन्नर के नाम से भी जाना जाता है, ना ही समाज में इन्हे कोई मान सम्मान मिलता है। मगर देश की लोक अदालत ने पहली ट्रांसजेंडर  जज का रूप के रूप में जोयिता मंडल मिली है जो लोगों को उनका हक दिलाएंगी।
जोयिता को उत्तर दिनाजपुर (पश्चिम बंगाल) के इस्लामपुर की लोक अदालत में जज नियुक्त किया गया है। वह इस समुदाय की उन चंद लोगों में से हैं, जिन्होंने तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुए कामयाबी हासिल की है। बचपन से ही भेदभाव का सामना करने वाली जोयिता को अक्सर घरवालों से भी डांट सुनना पड़ता था। स्कूल में अन्य दोस्तों से ताने सुनने के बाद मजबूरी में उन्हे स्कूल छोड़ना पड़ा और बाद में इसी तरह की समसायों की वजह से उन्होंने अपना घर छोड़ दिया। जहां कहीं नौकरी की वहाँ भी मज़ाक उड़ाया गया, यहाँ तक की किराये पर कमरा ना मिलने की वजह से कई बार खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी।

मगर आखिरकार वो समय भी आ ही गया जब 29 साल की जोयिता की लंबी लड़ाई का सुखद अंत हुआ, जब उत्तर दिनाजपुर की सब डिविजनल लीगल सर्विसेज कमेटी ऑफ इस्लामपुर ने लोक अदालत के जज के रूप में उन्हें नियुक्त किया गया। इस पद पर आने के बाद जोयिता काफी खुश हैं, उनका कहना है की देश में काफी ट्रांसजेंडर्स ऐसी हैं, जिन्हें अगर बेहतर मौका दिया जाए तो काफी बेहतर कर सकती हैं। हम सभी को इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए की जीवन में कुछ भी मुश्किल नही है बस जरूरत है कोशिश करने की और असफलताओ से लड़ने की क्योंकि इंसान की हिम्मत से बड़ी इस दुनिया में कोई लडाई नही है।

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