अगर आप भी पहली बार कर रही हैं हरियाली तीज तो जरूर ध्‍यान रखें ये 5 बातें

हरियाली तीज का त्यौहार सावन के महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है| हरियाली तीज के ही दिन भगवान शिव और माता पार्वती का पुर्नमिलन हुआ था| ऐसी मान्यता हैं की माता पार्वती को भगवान शिव ने उनके 108वें जन्म में स्वीकारा था| अर्थात माता पार्वती को भगवान शिव को पाने के लिए 107 जन्मो तक इंतजार करना पड़ा था| यदि यह आपकी पहली हरियाली तीज है तो इसकी पूजा से संबंधित कुछ खास बातों का ध्यान जरूर रखें|

यदि आप इस साल से हरियाली तीज का व्रत रखना चाहती हैं तो हम आपको आज इस पूजा से संबन्धित कुछ ऐसी बातें बताने वाले हैं, जो कि इस व्रत को रखने में बहुत ही जरूरी होता है| इस व्रत में हाथों में नई-नई चूड़ियां, हाथ व पैरों में नेल-पालिश और मेहंदी रचाई जाती है| आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि इस दिन माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है|

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हरियाली तीज की पूजा करते समय ध्यान रखें ये 5 बातें

(1) हरियाली तीज के दिन सबसे पहले स्नान करें और फिर माता पार्वती की प्रतिमा को रेशमी वस्त्र और गहनों से सजाएँ|

(2) अर्धगोले आकार की माता की मूर्ति बनाए और उसे पूजा के स्थान के बीच में रखें| इसके बाद आप इस मूर्ति की पुजा करे| पूजा में कथा का खास महत्व होता है, इसलिए हरियाली तीज व्रत कथा जरूर सुनें और कथा सुनते समय अपने पति का ध्यान अवश्य करें|

(3) हरियाली तीज के व्रत में पानी नहीं पिया जाता हैं| दुल्हन की तरह सोलह शृंगार करे और हरे कपड़े और जेवर पहनें| इस खास मौके पर मेहंदी लगवाना शुभ होता है| नवविवाहित लड़कियां अपनी पहली हरियाली तीज अपने मायके में मनाती हैं|

(4) कुछ स्थानो पर महिलाएं मां पार्वती की पूजा- अर्चना के बाद लाल मिट्टी से नहाती भी हैं| मान्यता है कि ऐसा करने से महिलाएं पूरी तरह से शुद्ध हो जाती हैं|

(5) हरियाली तीज के दिन के अंत में सभी महिलाएं खुशी-खुशी नाचती-गाती हैं और इस खास अवसर महिलाएं झूला भी झूलती हैं| झूले को फूल-पट्टियों से सजाया जाता हैं|

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